Narmada Son Link Project: नर्मदा का पानी अब पहुंचेगा सोन बेसिन, MP में तैयार हुई भारत की सबसे लंबी वाटर टनल

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Narmada Son Link Project: नर्मदा नदी के पानी को सोन बेसिन तक पहुँचाने का जो सपना सालों से देखा जा रहा था, वह अब आखिरकार सच होने जा रहा है। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में विंध्य पहाड़ियों के सीने को चीरकर करीब 12 किलोमीटर लंबी एक भूमिगत सुरंग तैयार की गई है। इस Narmada Son Link Project के पूरा होने से जहाँ एक तरफ लाखों किसानों के खेतों तक पानी पहुँचेगा, वहीं दूसरी तरफ सदियों पुरानी एक अधूरी दास्तान भी पूरी होने जा रही है। आइए जानते हैं कि इस पूरे काम को कैसे अंजाम दिया गया और यह हमारे लिए क्यों खास है।

आखिरकार मिल रहे नर्मदा और सोनभद्र

हमारे यहाँ लोककथाओं में एक कहानी बहुत प्रचलित है कि मैकल पहाड़ियों की बेटी नर्मदा का विवाह सोनभद्र से होना तय हुआ था, लेकिन एक गलतफहमी की वजह से नर्मदा रूठकर पश्चिम की ओर बह गईं और सोनभद्र पूर्व की ओर चले गए। सदियों बाद अब इंसानी सूझबूझ और Narmada Son Link Project की कड़ी मेहनत ने विंध्य के पहाड़ों के बीच से रास्ता बनाकर इन्हें फिर से मिला दिया है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के अनुसार, सुरंग की खुदाई कर रही टनल बोरिंग मशीनें अब अपने आखिरी सीमेंटेड कुएं तक पहुंच चुकी हैं और बहुत जल्द ही नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा।

भारी-भरकम बजट और अत्याधुनिक मशीनें

साल 2011 में जब इस Narmada Son Link Project की शुरुआत हुई थी, तब इसकी लागत लगभग 799 करोड़ रुपये तय की गई थी। हालांकि, जैसे-जैसे काम आगे बढ़ा और मुश्किलें सामने आईं, इस प्रोजेक्ट का कुल बजट बढ़कर 1500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस काम को पूरा करने के लिए अमेरिका और जर्मनी से बेहद खास और आधुनिक मशीनें मंगाई गई थीं। अब इन मशीनों को सुरंग से बाहर निकालने के लिए अधिकारियों ने 100 फीट गहरा एक विशेष कुआँ तैयार किया है, जहाँ से क्रेन की मदद से मशीनों के कल-पुर्जे बाहर निकाले जा रहे हैं।

इंजीनियरिंग की दुनिया का एक बेजोड़ नमूना

इस पूरे Narmada Son Link Project को पूरा करना देश के इंजीनियर्स के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं था। पहाड़ के अंदर कई किलोमीटर नीचे काम करते हुए मजदूरों को न तो सूरज की रोशनी दिखती थी और न ही ताजी हवा मिलती थी। काम के दौरान पानी का रिसाव, जहरीली गैसों का निकलना और मलबे का गिरना जैसी कई चुनौतियां सामने आईं। लेकिन कमाल की बात यह है कि इतनी मुश्किलों के बाद बनी यह टनल बिना किसी बिजली के पंप के, सिर्फ गुरुत्वाकर्षण यानी ढलान की मदद से नर्मदा का पानी सोन बेसिन तक पहुंचाएगी।

स्लीमनाबाद सुरंग का पूरा होना केवल एक सरकारी काम का खत्म होना नहीं है, बल्कि यह Narmada Son Link Project करोड़ों किसानों के सूखे खेतों तक खुशहाली पहुंचाने का एक जरिया है। पहाड़ के बीच से रास्ता बनाकर रूठी हुई नर्मदा के जल को सोनभद्र तक पहुंचाना वाकई एक बड़ी उपलब्धि है। पानी छोड़े जाने के बाद इस Narmada Son Link Project से आस-पास के ग्रामीण इलाकों की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी और सिंचाई के संकट से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

यह भी पढ़ें : Rural Credit से मजबूत हो रही भारत की अर्थव्यवस्था, किसानों और छोटे उद्यमों को मिल रहा बढ़ावा
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