CM Yogi Saharanpur visit: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में सहारनपुर का दौरा किया, जहां उन्होंने न सिर्फ एक बड़े अभियान की शुरुआत की, बल्कि विपक्षी दलों पर भी जमकर निशाना साधा। चुनावी माहौल हो या विकास कार्यों का जायजा, यूपी की सियासत में सहारनपुर हमेशा से एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इस बार मुख्यमंत्री ने वहां पहुंचकर सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी की पुरानी नीतियों को कटघरे में खड़ा किया और कानून-व्यवस्था से लेकर विकास के मुद्दों पर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। आइए जानते हैं कि इस पूरे दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कौन से बड़े दावे किए और विपक्ष को किस तरह घेरा।

स्कूल चलो अभियान (School Chalo Abhiyan) के दूसरे चरण की शुरुआत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस सहारनपुर दौरे का मुख्य मकसद उत्तर प्रदेश में ‘School Chalo Abhiyan’ के दूसरे चरण का आगाज करना था। शिक्षा के स्तर को सुधारने और हर बच्चे को स्कूल तक पहुंचाने के लिए इस अभियान को राज्य सरकार एक बड़े मिशन के रूप में देख रही है। सहारनपुर में आयोजित इस खास कार्यक्रम के मंच से सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश का माहौल बदल चुका है। उन्होंने बुनियादी ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में चारों तरफ सड़कें और एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, जिससे कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं में सुधार को उन्होंने अपनी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया।

CM Yogi Saharanpur visit: पुराने दौर की कानून-व्यवस्था पर तीखा प्रहार
मंच से बोलते हुए मुख्यमंत्री ने साल 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की याद दिलाई और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सपा सरकार को घेरा। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि एक समय था जब सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मथुरा और अलीगढ़ जैसे जिलों में दंगे और कर्फ्यू आम बात बन चुके थे। कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त थी और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस करता था।
मुख्यमंत्री ने कैराना और कांधला जैसे कस्बों से हुए पलायन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस दौर में न तो बेटियां सुरक्षित थीं और न ही व्यापारी चैन से रह पा रहे थे। उन्होंने मुरादाबाद में डीआईजी पर हुए हमले की पुरानी घटना को याद दिलाते हुए कहा कि तत्कालीन सरकार उपद्रवियों पर कार्रवाई करने के बजाय उनके केस वापस लेने की कोशिशों में जुटी थी, जबकि वर्तमान सरकार में ऐसे तत्वों को सजा दिलाई गई है।

बजट के विजन और विकास कार्यों पर सवाल
विकास कार्यों के लिए मिलने वाले बजट और उसके सही इस्तेमाल को लेकर भी सीएम योगी ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उनका कहना था कि पैसा पहले की सरकारों के पास भी था, लेकिन उसे कहां और कैसे खर्च करना है, इसके लिए कोई साफ विजन नहीं था।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा या तो गुर्गों की जेब में जाता था या फिर कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने में खर्च कर दिया जाता था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आज उसी विजन और पैसे के दम पर मां शाकुंभरी देवी के दरबार में एक भव्य और शानदार कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है, जो 2017 से पहले केवल एक सपना बनकर रह गया था।
सैफई बनाम पूरे प्रदेश के विकास की राजनीति
मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवाद और परिवारवाद के मुद्दे को हवा देते हुए सपा के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक लाख से ज्यादा राजस्व गांव हैं, लेकिन पहले की सरकार को सिर्फ अपने गृह जनपद के एक गांव ‘सैफई’ की ही चिंता रहती थी।
सहारनपुर या प्रदेश के दूसरे कोनों में बसे गांवों और कस्बों की सुध लेने वाला कोई नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज राज्य में ‘डबल इंजन’ की सरकार काम कर रही है, जिसका दृष्टिकोण किसी एक परिवार या गांव तक सीमित नहीं है। आज की सरकार जब योजनाएं बनाती है, तो वह राज्य के सभी 1 लाख 7 हजार गांवों, 57 हजार ग्राम पंचायतों और सभी विकासखंडों को ध्यान में रखकर काम करती है।
आस्था के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा
भाषण के आखिरी हिस्से में मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था के मुद्दों पर विपक्ष के दोहरे चरित्र को उजागर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जो लोग आज आस्था की बातें कर रहे हैं, वे कभी मां शाकुंभरी देवी के दर्शन करने तक नहीं गए और हमेशा हिंदू आस्था को सांप्रदायिकता से जोड़ते रहे।
सीएम योगी ने अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि यह वही लोग हैं जिन्होंने कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं और दावा किया था कि अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकता। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि राज्य में किसी को भी आस्था के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
सहारनपुर के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा के बड़े अभियान की शुरुआत करने के साथ-साथ एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी दे दिया है। उन्होंने कानून-व्यवस्था, सरकारी बजट के सही इस्तेमाल और सर्वव्यापी विकास को अपनी सरकार का मुख्य हथियार बनाया है। विपक्ष पर तीखे हमलों के जरिए उन्होंने आगामी राजनीतिक पिचों की जमीन तैयार कर दी है, जहां सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव सबसे बड़े मुद्दे रहने वाले हैं।