Pulse Polio Abhiyan: भारत को विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से साल 2014 में ही पूरी तरह से 'पोलियो मुक्त देश' घोषित किया जा चुका है। यह हमारे देश के स्वास्थ्य इतिहास की एक बहुत बड़ी कामयाबी है, लेकिन इसके बाद भी हमें लगातार सतर्क रहने की जरूरत है। असल में हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान में अभी तक पोलियो पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। पड़ोसी मुल्क होने की वजह से वहां के लोगों का भारत में लगातार आना-जाना बना रहता है, जिससे देश में दोबारा संक्रमण फैलने का खतरा हमेशा रहता है। इसी खतरे से अपने देश के बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए एक बार फिर देश के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि हमारी अब तक की मेहनत बेकार न जाए।
Pulse Polio Abhiyan
देश को इस गंभीर बीमारी के खतरे से बचाए रखने के लिए 28 जून से 4 जुलाई तक विशेष पल्स पोलियो अभियान (Pulse Polio Abhiyan) चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत पहले दिन यानी रविवार को जगह-जगह पोलिंग बूथों पर बच्चों को दवा पिलाई जा रही है। उदाहरण के तौर पर देखें तो नैनीताल जैसे पहाड़ी जिले में ही इस बार बच्चों को पोलियो ड्रॉप यानी ‘दो बूंद जिंदगी की’ पिलाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए जिले भर में करीब 934 पोलिंग बूथ तैयार किए गए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डब्ल्यूएचओ उन पड़ोसी देशों को भी दवाएं उपलब्ध कराता है, लेकिन वहां के स्थानीय प्रशासन में इच्छाशक्ति की कमी के कारण बीमारी जड़ से खत्म नहीं हो पा रही है। यही वजह है कि पहले दिन बूथों पर दवा पिलाने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें 4 जुलाई तक घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को कवर करेंगी।

राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में भी इस राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत बेहद सक्रियता के साथ हुई। जिला महिला चिकित्सालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान स्थानीय सांसद रवि किशन शुक्ला ने खुद बच्चों को पोलियो की दो बूंदें पिलाकर इस काम की शुरुआत की। उन्होंने इस मौके पर आम जनता से सीधे अपील करते हुए कहा कि भले ही हमने पोलियो के खिलाफ एक लंबी और बड़ी लड़ाई जीती है, लेकिन जब तक खतरा पूरी तरह टल नहीं जाता, तब तक हमें ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए।
5 साल तक के हर एक बच्चे तक इस खुराक को पहुंचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी माता-पिता से अपने बच्चों को नजदीकी बूथ तक लाने की गुजारिश की ताकि कोई भी बच्चा सुरक्षा चक्र से बाहर न छूटे।

बच्चों का स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
कार्यक्रम के दौरान सांसद ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बच्चों का स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर आने वाली पीढ़ी के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए लगातार नीतियां बना रही हैं। समय-समय पर चलाए जाने वाले ये टीकाकरण अभियान इसी बड़ी सोच का हिस्सा हैं।
पोलियो की ये दो बूंदें किसी भी बच्चे को जीवन भर की शारीरिक अक्षमता से बचा सकती हैं, इसलिए इस मामले में किसी भी तरह की अफवाह, भ्रम या लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। प्रशासन ने इसके लिए पूरी तैयारी की है और जो बच्चे किसी वजह से पहले दिन बूथ तक नहीं आ पाएंगे, उन्हें आशा कार्यकर्ता और एएनएम की टीमें घर-घर जाकर दवा पिलाएंगी। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि देश का एक भी बच्चा इस जरूरी खुराक से वंचित न रहे।

देखा जाए तो पोलियो के खिलाफ भारत की मुहिम तब तक खत्म नहीं हो सकती, जब तक दुनिया के नक्शे से यह बीमारी पूरी तरह साफ नहीं हो जाती। पाकिस्तान और अफगानिस्तान से संक्रमण के ट्रांसफर होने की आशंका के चलते यह खुराक देते रहना हमारी मजबूरी भी है और अपने बच्चों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की टीमों के साथ-साथ आम जनता और अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। जब हर परिवार सजग रहेगा और अपने 5 साल तक के बच्चों को समय पर यह दवा दिलाएगा, तभी देश का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित और सेहतमंद बना रह सकेगा।
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