भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। करीब साढ़े तीन महीने पहले शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद, पहला भारतीय एलएनजी (LNG) टैंकर 'Disha' होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते सुरक्षित निकलकर गुजरात के दाहेज पोर्ट पर पहुंच गया है। माल्टा के झंडे वाला यह विशाल टैंकर अपने साथ भारी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) लेकर आया है, जिससे देश में गैस की आपूर्ति को बड़ी राहत मिलेगी।
दाहेज बंदरगाह पर लंगर डाले खड़ा है पोत ‘Disha’
गुजरात के भरूच बंदरगाह प्राधिकरण से मिली जानकारी के मुताबिक, ‘LNGC Disha’ नाम का यह जहाज शुक्रवार सुबह दाहेज बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच गया। फिलहाल यह पेट्रोनेट एलएनजी जेटी पर लंगर डाले खड़ा है और इस पर 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी कार्गो लोड है।
शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा प्रबंधित इस टैंकर को पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने चार्टर्ड किया है। यह जहाज अमेरिका और ईरान के बीच हुए शुरुआती सीजफायर यानी युद्धविराम की घोषणा के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले शुरुआती कमर्शियल जहाजों में से एक बन गया है।
भारत के लिए क्यों बेहद अहम है यह समुद्री रास्ता?
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के डायरेक्टर ओपेश कुमार शर्मा ने भी पहले ही इसके शुक्रवार तक पहुंचने की उम्मीद जताई थी, जो बिल्कुल सही साबित हुई। दरअसल, यह रूट भारत के लिए बहुत मायने रखता है। भारत अपनी जरूरत की लगभग आधी नेचुरल गैस बाहर से आयात करता है। इसमें से करीब 65 फीसदी हिस्से की आपूर्ति कतर जैसे खाड़ी देशों से होती है और यह सारा व्यापार इसी होर्मुज समुद्री रास्ते के जरिए किया जाता है।
बीती 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे, तो जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था। अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद तेहरान ने 60 दिनों के लिए बिना किसी फीस के जहाजों की आवाजाही को मंजूरी दी है, जिससे व्यापार फिर शुरू हो सका है।
एलएनजी टैंकर ‘Disha’ का सुरक्षित भारत पहुंचना वैश्विक तनाव के बीच हमारे आयात तंत्र की मजबूती को दिखाता है। होर्मुज स्ट्रेट का दोबारा खुलना और भारतीय जहाजों का वहां से सुरक्षित गुजरना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में देश में ईंधन और गैस की आपूर्ति सामान्य बनी रहेगी, जो हमारी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
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