UP DGP: IPS राजीव कृष्ण बने UP के स्थायी DGP, 2022 के बाद राज्य को मिला पहला परमानेंट पुलिस चीफ

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UP DGP: उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे के शीर्ष स्तर पर पिछले करीब चार वर्षों से बनी अनिश्चितता की स्थिति आखिरकार समाप्त हो गई है। राज्य सरकार ने शनिवार को एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए 1991 बैच के वरिष्ठ और बेहद तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को उत्तर प्रदेश का नया पुलिस महानिदेशक UP DGP नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही वह साल 2022 के बाद प्रदेश के पहले पूर्णकालिक और स्थायी पुलिस मुखिया बन गए हैं।

IPS राजीव कृष्ण, जिन्होंने मई 2025 में प्रशांत कुमार के बाद कार्यवाहक UP DGP के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी, अब देश के सबसे बड़े पुलिस बल का स्थायी नेतृत्व करेंगे। वर्तमान में उनके पास जून 2029 में अपनी सेवानिवृत्ति से पहले लगभग तीन साल का लंबा सेवाकाल शेष है। इसके अतिरिक्त, वह वर्तमान में सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के महानिदेशक के पद पर भी कार्यरत हैं। उनकी इस स्थायी नियुक्ति के साथ ही यूपी में कार्यवाहक डीजीपी के दौर का अंत हो गया है, जिसकी शुरुआत 2022 में मुकुल गोयल को पद से हटाए जाने के बाद हुई थी। इस बीच यूपी ने डी एस चौहान, आर के विश्वकर्मा, विजय कुमार और प्रशांत कुमार के रूप में चार कार्यवाहक पुलिस प्रमुखों का कार्यकाल देखा।

60 हजार से अधिक सिपाही भर्ती को पारदर्शिता से कराया संपन्न

आईपीएस राजीव कृष्ण के करियर की हालिया सबसे बड़ी उपलब्धियों में साल 2024 की सिपाही भर्ती परीक्षा की कमान संभालना रहा है। पेपर लीक के आरोपों के बाद जब परीक्षा रद्द हुई, तो सरकार ने शुचितापूर्ण ढंग से दोबारा परीक्षा कराने का जिम्मा उन्हें सौंपा। उनके कुशल निर्देशन और सख्त निगरानी में 60,000 से अधिक पदों पर कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया बेहद पारदर्शी, कुशल और निष्पक्ष तरीके से पूरी हुई, जिसकी प्रशासनिक और सार्वजनिक हलकों में जमकर सराहना की गई।

तीन दशकों से अधिक का बेदाग और शानदार करियर

तीन दशकों से भी अधिक लंबे अपने शानदार सेवाकाल के दौरान राजीव कृष्ण ने कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल और नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाई हैं। उन्होंने मथुरा, इटावा, आगरा, नोएडा और राजधानी लखनऊ जैसे संवेदनशील व प्रमुख जिलों में पुलिस कप्तान (SP/SSP) के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस अकादमी के प्रमुख के तौर पर भी कार्य किया, जहां उन्होंने युवा पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित और मार्गदर्शित करने में अमूल्य योगदान दिया।

यूपी एटीएस के संस्थापक और देश की सीमा सुरक्षा में अहम भूमिका

राजीव कृष्ण के नाम उत्तर प्रदेश में आतंकवाद विरोधी बुनियादी ढांचे की मजबूत नींव रखने का श्रेय दर्ज है। वह ‘उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते’ (UP ATS) के संस्थापक प्रमुख रहे हैं। उनके शुरुआती कार्यकाल ने ही इस सुरक्षा एजेंसी के परिचालन ढांचे और आतंकवाद विरोधी क्षमताओं को आकार देने का काम किया।

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राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सेवाएं देते हुए उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (BSF) में महानिरीक्षक (अभियान) यानी IG (Operations) का पद संभाला। इस दौरान उन्होंने भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमाओं पर सुरक्षा ऑपरेशनों की कमान संभाली। उन्होंने सीमा सुरक्षा को आधुनिक बनाने के लिए ‘व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली’ (CIBMS) के तहत सेंसर-आधारित अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों को लागू कराया, जिससे सीमा पर चौकसी और बढ़ी।

आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग के रहे हैं पैरोकार

पुलिस महकमे में तकनीक और आधुनिक तौर-तरीकों को बढ़ावा देने के लिए पहचाने जाने वाले राजीव कृष्ण ने फील्ड पोस्टिंग के दौरान कई बड़े प्रयोग किए। आगरा जोन के एडीजी रहते हुए उन्होंने आदतन और शातिर अपराधियों की पहचान व ट्रैकिंग के लिए ‘ऑपरेशन पहचान’ नामक मोबाइल-बेस्ड प्लेटफॉर्म लॉन्च किया था। उन्होंने केस प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स के बेहतर प्रबंधन के लिए ‘ई-मालखाना’ जैसी डिजिटल पहलों को आगे बढ़ाया। इसके अलावा, महिला बीट पुलिसिंग और एंटी-रोमियो स्क्वॉड की ऑनलाइन मॉनिटरिंग व्यवस्था को भी उन्होंने खासा मजबूत किया। वह पुलिस कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जन जागरूकता अभियानों के माध्यम से साइबर अपराध की रोकथाम और जांच क्षमताओं को बढ़ाने के प्रयासों से लगातार जुड़े रहे हैं।

बीटेक डिग्रीधारी और सबसे युवा कप्तानों में रहे शुमार

20 जून 1969 को लखनऊ में जन्मे राजीव कृष्ण ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में बैचलर्स (B.Tech) की डिग्री हासिल की है। साल 1991 में प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे भारतीय पुलिस सेवा का हिस्सा बने। एक बेदाग छवि, मजबूत ऑपरेशनल क्रेडेंशियल्स और पेशेवर कार्यशैली के चलते उन्होंने पुलिस सेवा में अपनी एक अलग साख बनाई। वे अपने शुरुआती दिनों में राज्य के सबसे युवा आईपीएस अधिकारियों में से एक रहे हैं। उनके करियर का एक बेहद चर्चित पड़ाव साल 2004 में आया, जब उन्होंने एसएसपी आगरा के रूप में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीहड़ों और डकैत प्रभावित क्षेत्रों में कुख्यात फिरौती और अपहरण करने वाले गिरोहों के खिलाफ एक बड़ा और सफल अभियान चलाया था।

यूपी पुलिस को मिलेगी स्थिरता और आधुनिक दिशा

वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के सामने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ रखने, साइबर क्राइम पर नकेल कसने, संगठित अपराध को नेस्तनाबूद करने और पुलिस बल के आधुनिकीकरण जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे दौर में आईपीएस राजीव कृष्ण की स्थायी नियुक्ति से उत्तर प्रदेश पुलिस के शीर्ष नेतृत्व को एक स्थिरता और निरंतरता मिलेगी। उनकी इस तैनाती को सरकार के उस स्पष्ट संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है जिसके तहत प्रदेश में तकनीकी सुधारों को गति देने के साथ-साथ पुलिस बल की पेशेवर छवि और उसकी ऑपरेशनल क्षमता को और ज्यादा धारदार बनाया जा सके।

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