India-US Ties: भारत और अमेरिका के बीच जल्द होगा महा-व्यापार समझौता, विदेश मंत्री एस जयशंकर से मिले मार्को रुबियो

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India-US Ties: भारत के चार-दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने दोनों देशों के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को लेकर एक बड़ा और सकारात्मक बयान दिया है। अपने दौरे के दूसरे दिन रविवार (24 मई 2026) को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ नई दिल्ली में हुई एक द्विपक्षीय बैठक के बाद रुबियो ने स्पष्ट किया कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी भारत और अमेरिका के संबंधों की रफ्तार (Momentum) बिल्कुल कम नहीं हुई है।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत में अपने समय को ‘शानदार’ बताते हुए उम्मीद जताई कि दोनों देश लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Deal) को ‘जल्द ही’ अंतिम रूप (Seal) दे देंगे।

तनावपूर्ण आर्थिक माहौल के बीच India-US Ties बना उम्मीद की नई किरण

मार्को रुबियो का यह बयान और भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हालिया दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त टैरिफ नीतियों के कारण दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर कुछ हद तक खिंचाव देखा गया था। वाशिंगटन द्वारा कई भारतीय निर्यातों पर आयात शुल्क (Duties) बढ़ाए जाने के बाद दोनों देशों के व्यापारिक रुख पर कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन रुबियो के इस सकारात्मक बयान ने व्यापारिक गलियारों में फिर से नई उम्मीदें जगा दी हैं।

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क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले कूटनीतिक हलचल

  • व्यापक कूटनीतिक चर्चा: शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने के बाद रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ वन-टू-वन बैठक की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापारिक गतिरोधों को दूर करने और रणनीतिक क्षेत्रों में मिलकर काम करने का साझा रोडमैप तैयार किया।

  • 26 मई को ‘क्वाड’ महा-मंथन: मार्को रुबियो का यह पहला आधिकारिक भारत दौरा आगामी मंगलवार (26 मई 2026) को नई दिल्ली में होने वाली क्वाड (QUAD) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के ठीक पहले हो रहा है। इस महा-बैठक में भारत और अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्री भी हिस्सा लेंगे, जहां हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता पर व्यापक चर्चा होगी।

अमेरिकी राजनयिकों और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि रुबियो के इस रुख से न केवल दोनों देशों के बीच व्यापारिक शुल्क (टैरिफ) को लेकर जारी गतिरोध सुलझेगा, बल्कि रक्षा और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के सेक्टर में भी आपसी निवेश की राह और आसान होगी।

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