इजराइल के हाइफा में भारतीय फिल्म महोत्सव हुआ शुरु, सिनेमा से जुड़े सांस्कृतिक संबंधों को मिली नई दिशा

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भारतीय फिल्म महोत्सव का उद्घाटन

इजराइल के हाइफा में भारतीय सिनेमा प्रेमियों के लिए एक खास दिन रहा। भारतीय दूतावास ने हाइफा नगर पालिका के सहयोग से गुरुवार को दूसरे भारतीय फिल्म महोत्सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर 200 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जबकि देश की राजधानी यरुशलम में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शनों के बावजूद यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस महोत्सव का उद्देश्य भारत और इजराइल के बीच सांस्कृतिक पुल को और मजबूत करना और भारतीय सिनेमा की विविधता और विरासत को इजराइली दर्शकों तक पहुंचाना है।

पहले संस्करण की सफलता के बाद यह दूसरा संस्करण आयोजित किया गया। फरवरी में हुए पहले महोत्सव में भारत के प्रति उत्साही इजराइलियों ने बड़े पैमाने पर भाग लिया और इसे सराहा। इसी सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए भारतीय दूतावास ने हाइफा, तेल अवीव और अन्य शहरों में दो हफ्ते तक चलने वाले इस महोत्सव का आयोजन किया। महोत्सव के उद्घाटन समारोह में भारत के सांस्कृतिक प्रतिनिधियों और इजराइल के फिल्म निर्माता डैन वोलमैन ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वोलमैन ने इसे एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इससे भारतीय सिनेमा की गुणवत्ता और कहानी दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पहुंचेगी।

फिल्म : पद्मावत

हाइफा में बॉलीवुड का जलवा

महोत्सव के दौरान कुल छह फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इन फिल्मों में ‘पद्मावत’, ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’, ‘जवान’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘अंधाधुन’ और ‘12वीं फेल’ शामिल थीं। इन फिल्मों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, भावनाएं, परंपराएं और समाज की विविधताएं दर्शकों के सामने आईं। विशेष रूप से युवाओं ने इन फिल्मों को लेकर गहरी रुचि दिखाई और सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए। यह पहल भारत की सिनेमा विरासत को इजराइल के दर्शकों के करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

फिल्म : गंगूबाई काठियावाड़ी

भारत-इजराइल सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा

भारतीय दूतावास के मिशन उप-प्रमुख सर्वजीत सूदन ने कहा कि यह महोत्सव केवल फिल्मों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत और इजराइल के बीच भावनात्मक और सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करने का एक माध्यम है। उन्होंने हाइफा नगर पालिका और स्थानीय अधिकारियों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया। उन्होंने यह भी बताया कि इजराइल में लगभग 46,000 भारतीय कार्यरत हैं, और ऐसे सांस्कृतिक आयोजन उन्हें अपनी जड़ों और देश से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

इस महोत्सव ने न केवल बॉलीवुड फिल्मों को इजराइली दर्शकों तक पहुँचाया, बल्कि भारत को एक वैश्विक फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में भी प्रदर्शित किया। दर्शकों ने फिल्मों की कहानी, अभिनय और संगीत की सराहना की। कार्यक्रम का अंतिम दिन विभिन्न संवाद और प्रश्नोत्तर सत्रों के माध्यम से सम्पन्न हुआ, जिसमें दर्शकों ने फिल्म निर्माताओं से सीधे बातचीत की और भारतीय सिनेमा की तकनीकी और रचनात्मक विविधताओं को समझने का अवसर पाया।

फिल्म : जवान

दो हफ्ते तक चलने वाले इस आयोजन ने हाइफा, तेल अवीव, नेतन्या, अफुला और डिमोना में भारतीय फिल्मों की प्रदर्शनी की। डिमोना, जिसे ‘लिटिल इंडिया’ के नाम से भी जाना जाता है, में यह महोत्सव विशेष रूप से लोकप्रिय रहा। इस तरह के आयोजन भारत और इजराइल के बीच सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में मदद कर रहे हैं। भविष्य में भी ऐसी पहल दोनों देशों के बीच मित्रता और समझ को बढ़ावा देने का जरिया बन सकती हैं।

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