दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर यात्रियों को जल्द ही राहत मिलने वाली है। महिपालपुर में शिवमूर्ति से लेकर सिरहौल बॉर्डर तक करीब चार किलोमीटर लंबे हिस्से को एलिवेटेड हाईवे में तब्दील किया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) जल्द ही इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने जा रहा है। यह प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में पेश किया गया, जिसमें कई केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस एलिवेटेड हाईवे के बनने से वर्तमान में आधे घंटे से अधिक का सफर महज तीन मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
बैठक में मुख्य रूप से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव, दिल्ली-जयपुर हाईवे की समस्याओं और चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई। खासकर महिपालपुर फ्लाईओवर से लेकर एंबियंस मॉल तक का हिस्सा हर रोज जाम की बड़ी समस्या झेलता है, जहाँ तीन किलोमीटर की दूरी तय करने में यात्रियों को आधा घंटा या उससे भी अधिक समय लग जाता है। यह प्रस्ताव लंबे समय से लंबित था और अब इस पर कार्यवाही शुरू होने से यात्रियों में उम्मीद जगी है कि आने वाले महीनों में इस मार्ग पर राहत देखने को मिलेगी।
हाईवे को एलिवेटेड करने का निर्णय, महिपालपुर से सिरहौल तक होगा पहला चरण
बैठक में गुड़गांव से सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि महिपालपुर फ्लाईओवर से गुजरना यात्रियों के लिए रोजमर्रा की कठिनाई बन गया है। यहां एयरपोर्ट के पास होने के कारण सड़क का विस्तार सीमित है, इसलिए एलिवेटेड हाईवे सबसे उपयुक्त विकल्प है। उन्होंने आग्रह किया कि महिपालपुर से सिरहौल बॉर्डर तक का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए।
अधिकारियों ने बताया कि डीपीआर की तैयारी जल्द ही शुरू होगी और आवश्यक तकनीकी अध्ययन के बाद परियोजना को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। एनएचएआई ने बताया कि इस एलिवेटेड हाईवे के बनने से न केवल दिल्ली-गुरुग्राम मार्ग पर जाम की समस्या खत्म होगी, बल्कि एयरपोर्ट, द्वारका, और गुड़गांव के बीच यात्रा भी सुगम हो जाएगी।
राव इंद्रजीत सिंह ने यह सुझाव भी दिया कि महिपालपुर के नीचे से आने वाले ट्रैफिक को सर्विस लेन के जरिए कापसहेड़ा और गुरुग्राम की ओर मोड़ा जाए, ताकि एक्सप्रेसवे पर वाहनों की भीड़ कम हो। उन्होंने भविष्य में मानेसर तक सिग्नल-फ्री ट्रैफिक योजना को भी तेजी से आगे बढ़ाने का सुझाव दिया। इस सुझाव का समर्थन करते हुए मंत्री नितिन गडकरी ने अधिकारियों को जल्द रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
दिल्ली-जयपुर हाईवे और बावल फ्लाईओवर निर्माण पर भी चर्चा
बैठक में दिल्ली-जयपुर हाईवे के सुधार कार्यों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। खासकर मानेसर से एनएसजी गेट के आगे तक हाईवे को एलिवेटेड करने की योजना पर विचार किया गया। राव इंद्रजीत सिंह ने सुझाव दिया कि हाईवे को पहाड़ी क्षेत्र तक बढ़ाया जाए ताकि ट्रैफिक का दबाव कम हो सके। इस पर मंत्री नितिन गडकरी ने एनएचएआई अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
साथ ही रेवाड़ी जिले के बावल चौक पर बन रहे फ्लाईओवर की धीमी प्रगति पर भी नाराजगी जताई गई। पिछले तीन महीने से काम ठप पड़ा हुआ है और इसके चलते स्थानीय लोगों को भारी जाम और धूल प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। नितिन गडकरी ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को जनवरी तक काम पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके अलावा गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी हाईवे की धीमी रफ्तार, पचगांव टोल प्लाजा और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के उजिना एंट्री पाइंट जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सभी परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए।
प्रदूषित पानी और बारिश में जलभराव की समस्या पर भी बनी सहमति
बैठक में केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय पहलुओं पर भी चर्चा हुई। धारूहेड़ा क्षेत्र में दिल्ली-जयपुर हाईवे पर भिवाड़ी से आने वाले प्रदूषित और बरसाती पानी के कारण लगने वाले जाम को लेकर विशेष वार्ता की गई। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि राजस्थान सरकार भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्रों में जल शुद्धिकरण संयंत्र का निर्माण कर रही है, जो दिसंबर तक पूरा हो जाएगा।
इसके बाद भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले 34 एमएलडी दूषित पानी का निस्तारण स्थानीय स्तर पर ही किया जा सकेगा। साथ ही बरसाती पानी के प्रबंधन के लिए छह किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बनाने पर विचार किया गया, जो इस पानी को साहबी नदी तक पहुंचाएगी। इससे हाईवे पर जलभराव और जाम की समस्या में काफी कमी आने की उम्मीद है।
दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी
दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर एलिवेटेड हाईवे का निर्माण दिल्ली-एनसीआर के लाखों यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा। यह सिर्फ ट्रैफिक कम करने की परियोजना नहीं है, बल्कि क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को गति देने वाला कदम है। एयरपोर्ट, द्वारका, और गुरुग्राम के बीच अब निर्बाध आवागमन संभव होगा, जिससे व्यावसायिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के प्रभाव को और मजबूत करेगी। यात्रियों को अब घंटों जाम में फंसने की बजाय कुछ ही मिनटों में यात्रा पूरी करने का अनुभव मिलेगा। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ, तो 2026 तक यह एलिवेटेड हाईवे जनता के लिए खुल सकता है। यह दिल्ली-एनसीआर की सबसे व्यस्त सड़कों में यातायात सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।