State Vigilance News: उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के उन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं, जो भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर किसी की भी संलिप्तता गलत कामों में पाई गई, तो उनका बचना नामुमकिन होगा। हाल ही में मुख्य सचिव एसपी गोयल ने एक बड़ा आदेश जारी किया है, जिसके तहत बिजली कर्मियों के आय से अधिक संपत्ति के मामलों की जांच अब आंतरिक विभाग के बजाय सीधे स्टेट Vigilance के जिम्मे होगी। इस फैसले का मकसद व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचारियों के मन में डर पैदा करना है।
क्या बदला है पुरानी जांच व्यवस्था में?
अभी तक बिजली विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार या आय से अधिक संपत्ति की शिकायतों की जांच के लिए दो रास्ते थे—आंतरिक Vigilance या स्टेट की टीम। अक्सर विभाग के भीतर होने वाली जांचों पर सवाल उठते थे। हालांकि आंतरिक टीम में भी पुलिस विभाग से डेप्युटेशन पर आए अफसर ही होते हैं, लेकिन अब एसपी गोयल ने इस पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। अब आंतरिक जांच का प्रावधान खत्म कर दिया गया है और यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है।
सौ से ज्यादा मामले हो सकते हैं ट्रांसफर
पावर कॉरपोरेशन के सूत्रों की मानें तो वर्तमान में लगभग 100 से अधिक ऐसे मामले हैं, जिनकी जांच अभी आंतरिक विभाग के पास लंबित है। नए आदेश के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि ये सभी फाइलें अब स्टेट Vigilance को सौंप दी जाएंगी। जब जांच का घेरा विभाग से बाहर निकलेगा, तो जाहिर है कि निष्पक्षता बढ़ेगी। सरकार का यह कदम उन अफसरों के लिए बड़ी चेतावनी है जो अपने पद का गलत फायदा उठाकर संपत्ति बना रहे थे।
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आम जनता की शिकायतों पर कड़ा रुख
बिजली विभाग में भ्रष्टाचार की खबरें कोई नई बात नहीं हैं। अक्सर लोग नया कनेक्शन लेने, मीटर ठीक कराने या कटे हुए कनेक्शन को दोबारा जुड़वाने के नाम पर रिश्वत मांगे जाने की शिकायत करते हैं। Vigilance की सख्ती बढ़ने से जमीनी स्तर पर इन शिकायतों में कमी आने की उम्मीद है। विभाग में छोटे लाइनमैन से लेकर बड़े अफसरों तक की मिलीभगत की बातें अक्सर सामने आती रहती हैं, लेकिन अब सीधे स्टेट लेवल की जांच से इन पर नकेल कसी जा सकेगी।
हालिया घटनाओं ने बढ़ाई सरकार की सख्ती
भ्रष्टाचार के खिलाफ यह कड़ा रुख अचानक नहीं आया है। पिछले कुछ महीनों में कई ऐसी घटनाएं हुईं जहाँ बिजली विभाग के कर्मचारी रंगे हाथों पकड़े गए। अप्रैल के महीने में ही वाराणसी में एंटी करप्शन टीम ने एक जेई और लाइनमैन को 50 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा था। वहीं औरैया में भी 20 हजार की घूस लेते हुए गिरफ्तारी हुई थी। इन मामलों ने साबित किया कि विभाग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। अब जब स्टेट Vigilance पूरे मामले को देखेगी, तो अफसरों के लिए बच निकलना बहुत कठिन होगा।
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भ्रष्टाचार किसी भी विभाग की साख को खराब करता है और सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश सरकार का स्टेट Vigilance को यह जिम्मेदारी सौंपना एक सही दिशा में उठाया गया कदम है। अगर वाकई जांच सही तरीके से हुई, तो विभाग में ईमानदारी से काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और गलत काम करने वालों को अपनी जगह पता चल जाएगी। उम्मीद है कि इस फैसले से बिजली विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा।
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