Delhi: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की मौजूदगी में ‘नवाचार और समावेशिता: भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम प्रथाएं’ विषय पर 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया। Delhi में आयोजित यह शिखर सम्मेलन देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया है, जहां स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे नवाचारों, नीतिगत सुधारों और सफल मॉडलों को साझा किया जा रहा है। Delhi में आयोजित इस पहल का उद्देश्य देश में समावेशी, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करना है, जिससे अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें।
स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और समावेशिता को बढ़ावा
Delhi में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने हरियाणा सरकार द्वारा शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए आभार व्यक्त किया और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में राज्य की पहल और नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि Delhi जैसे मंच न केवल राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करते हैं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में लागू की जा रही सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। इससे देशभर में एक मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण में सहायता मिलती है।
उन्होंने कहा कि Delhi में हो रहा यह शिखर सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि जमीनी स्तर पर लागू की गई व्यावहारिक रणनीतियां किस प्रकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एक प्रभावी स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर सकती हैं। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य फोकस ऐसी प्रणालियों को विकसित करना है, जो न केवल कुशल और एकीकृत हों, बल्कि सेवा प्रदाताओं और लाभार्थियों दोनों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह भी हों। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार का उद्देश्य केवल नई तकनीकों को अपनाना नहीं है, बल्कि सेवा वितरण की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाना भी है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने Delhi में इस अवसर पर शुरू की गई विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कदम अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के कार्य को सरल बनाने के साथ-साथ मरीजों तक सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि जब तक जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को सशक्त नहीं किया जाएगा, तब तक किसी भी योजना का पूर्ण लाभ आम नागरिक तक नहीं पहुंच सकता।
पिछले दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन
पिछले एक दशक में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए परिवर्तन का उल्लेख करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवा के दृष्टिकोण में एक बड़ा बदलाव आया है, जहां पहले मुख्य रूप से उपचार-केंद्रित प्रणाली पर जोर दिया जाता था, वहीं अब एक समग्र और व्यापक स्वास्थ्य मॉडल अपनाया गया है, जिसमें निवारक, संवर्धक, उपचारात्मक और प्रशामक सभी पहलुओं को शामिल किया गया है।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस नीति ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समावेशी और जन-केंद्रित बनाया है। इसके साथ ही, Delhi सहित देशभर में स्थापित किए गए 1.85 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की भूमिका को भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने महत्वपूर्ण बताया, जो आज करोड़ों लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का पहला संपर्क बिंदु बन चुके हैं। इन केंद्रों के माध्यम से गैर-संचारी बीमारियों जैसे हाइपरटेंशन, डायबिटीज़ और विभिन्न प्रकार के कैंसर की समय पर जांच और रोकथाम सुनिश्चित की जा रही है, जिससे गंभीर बीमारियों के बोझ को कम करने में मदद मिल रही है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का परिणाम यह है कि Delhi सहित पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में व्यापक सुधार देखने को मिला है और आम नागरिकों को समय पर इलाज उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल इलाज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बीमारी की रोकथाम और स्वास्थ्य जागरूकता को भी बढ़ावा देना है, जिससे लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।
गुणवत्ता सुधार, उपलब्धियां और भविष्य की दिशा
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 50,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (NQAS) के तहत प्रमाणित किया जा चुका है, जो सेवा गुणवत्ता में सुधार का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि Delhi में भी इस तरह के मानकों को लागू करने पर जोर दिया जा रहा है और आने वाले समय में गुणवत्ता प्रमाणन के दायरे को और बढ़ाने तथा नियमित ऑडिट की प्रक्रिया को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बनी रहे।
स्वास्थ्य क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में संस्थागत प्रसव 79 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गए हैं, जो मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच को दर्शाता है। इसके साथ ही मातृ मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और जागरूकता अभियानों की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि भारत ने पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत और शिशु मृत्यु दर में 73 प्रतिशत की कमी हासिल की है, जो वैश्विक स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इसके अलावा, मलेरिया और तपेदिक (टीबी) जैसी बीमारियों पर नियंत्रण के क्षेत्र में भी भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि Delhi सहित देश में टीबी के मामलों में गिरावट वैश्विक औसत से अधिक तेज़ी से आई है और इलाज तक पहुंच 92 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि Delhi और अन्य राज्यों में जमीनी स्तर पर कार्यरत अधिकारियों, जैसे मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), के बीच योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि संसाधनों की उपलब्धता के साथ-साथ उनका समय पर और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने Delhi सहित पूरे देश में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी और योजनाओं के अंतिम छोर तक प्रभावी क्रियान्वयन को स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि एक सशक्त, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माण ही विकसित भारत की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक होगा।







