Kanpur: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहाँ के जाजमऊ इलाके में स्थित एक नामी जूता फैक्ट्री में मंगलवार देर रात ऐसी भीषण आग लगी कि आसमान में कई मीटर ऊँची लपटें दिखाई देने लगीं। इस घटना ने न केवल फैक्ट्री मालिक को करोड़ों का चपत लगाई है, बल्कि आसपास के रिहायशी इलाके में भी दहशत फैला दी।
शॉर्ट सर्किट से भड़की आग
हादसा जाजमऊ के वाजिदपुर इलाके में स्थित ‘एसएच इंटरनेशनल’ (SH International) नाम की फैक्ट्री में हुआ। शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। फैक्ट्री मालिक नौशाद अहमद के मुताबिक, उन्हें रात करीब 8 बजे फैक्ट्री में आग लगने की खबर मिली। जब तक वे मौके पर पहुँचते, आग इतनी विकराल हो चुकी थी कि उसने पूरी टेनरी को अपनी चपेट में ले लिया था। आग की लपटें करीब 20 मीटर ऊँची उठ रही थीं, जिसे देख इलाके के लोग सहम गए।

करोड़ों का नुकसान और जलता हुआ सेटअप
फैक्ट्री मालिक नौशाद के लिए यह आर्थिक रूप से बहुत बड़ा झटका है। उन्होंने बताया कि महज 7 दिन पहले ही फैक्ट्री में जूता फिनिशिंग का 2 करोड़ रुपये का नया सेटअप लगाया गया था। आग ने इस पूरे आधुनिक सेटअप को जलाकर खाक कर दिया। ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद जूता कटिंग यूनिट से लेकर पहली मंजिल पर स्थित सोलिंग, फिनिशिंग और पैकिंग विभाग तक, सब कुछ राख के ढेर में तब्दील हो गया। चमड़ा और स्प्रे में इस्तेमाल होने वाले ज्वलनशील पदार्थों की वजह से आग ने बहुत तेजी से पैर पसारे।
एमरॉल्ड गुलिस्तान निवासी नौशाद अहमद की वाजिदपुर स्थित SH इंटरनेशनल के नाम जूता फैक्ट्री है। उन्होंने बताया कि टेनरी से एक कर्मी ने रात 8 बजे आग की जानकारी दी। जब मौके पर पहुंचे तो टेनरी में आग पूरी तरह से फैल चुकी थी। उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस और दमकल को दी।
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संकरी गलियों ने बढ़ाई चुनौती
आग बुझाने में दमकल विभाग को काफी पसीना बहाना पड़ा। चूंकि फैक्ट्री रिहायशी और संकरी गलियों वाले इलाके में स्थित थी, इसलिए बड़ी गाड़ियाँ सीधे फैक्ट्री तक नहीं पहुँच पा रही थीं। फायर फाइटर्स को काफी दूर से लंबी पाइप लाइन बिछानी पड़ी। जाजमऊ, मीरपुर, फजलगंज और पनकी जैसे 7 अलग-अलग फायर स्टेशनों से गाड़ियों को बुलाया गया। करीब 23 बार पानी भरने के बाद रात 1 बजे के आसपास आग पर काबू पाया जा सका।
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खौफ में रहे आस-पड़ोस के लोग
फैक्ट्री के आसपास काफी घनी आबादी है, जिस वजह से खतरा और भी बढ़ गया था। आग की तपिश और ऊँची उठती लपटों को देखकर लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। आसपास की फैक्ट्रियों के मजदूरों ने भी पहले अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटें इतनी तेज थीं कि किसी के पास जाने की हिम्मत नहीं हुई। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन फैक्ट्री पूरी तरह तबाह हो गई।
कानपुर की यह घटना एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में फायर सेफ्टी और बिजली के उपकरणों की जांच की जरूरत को याद दिलाती है। रिहायशी इलाकों में चल रही फैक्ट्रियों में आग लगने पर बचाव कार्य कितना मुश्किल हो जाता है, यह जाजमऊ की इस घटना से साफ जाहिर है। फिलहाल प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और फैक्ट्री मालिकों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।
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