ग्रामीण भारत के लिए बड़ा बजट: MGNREGA और आवास योजनाओं में तेजी, सरकार ने जारी किए ₹17,744 करोड़

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नई दिल्ली: देश के ग्रामीण इलाकों के विकास और रोजगार की गारंटी को लेकर सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमित शुक्ला ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश की महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे MGNREGA, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की। उन्होंने साफ किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य बिना किसी रुकावट के काम देना और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।

MGNREGA: बजट में 21% की भारी बढ़ोतरी और समय पर पेमेंट

संयुक्त सचिव ने जानकारी दी कि MGNREGA के तहत मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। अप्रैल महीने की मजदूरी के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए पहले ही ₹17,744 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस साल ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजट में पिछले साल की तुलना में 21% का इजाफा किया गया है, जिससे मांग-आधारित योजनाओं को पूरा करने में काफी मदद मिलेगी।

अमित शुक्ला ने कहा, “MGNREGA और VBSY दोनों ही ऐसी योजनाएं हैं जो सीधे तौर पर ग्रामीणों की मांग पर टिकी हैं। बजट आवंटन में हुई बढ़ोतरी यह सुनिश्चित करेगी कि काम के सृजन में कोई कमी न आए। हाल ही में केंद्रीय मंत्री ने भी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि मजदूरों का भुगतान सुचारू रूप से और समय पर किया जाए।”

PM आवास योजना: 2029 तक 4.59 करोड़ घरों का लक्ष्य

प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G) को लेकर सरकार ने एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। मंत्रालय के अनुसार, मार्च 2029 तक 4.59 करोड़ घरों का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए ‘आवाससॉफ्ट’ सिस्टम के जरिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।

शुक्ला ने बताया कि सरकार राज्यों के साथ मिलकर उन तकनीकी दिक्कतों को दूर कर रही है जो निर्माण कार्य में बाधा डालती हैं। जिओ-टैगिंग के जरिए हर घर की प्रगति पर नजर रखी जा रही है। साथ ही, राज्यों से ‘मटेरियल बैंक’ बनाने का अनुरोध किया गया है ताकि लाभार्थियों को ईंट, सीमेंट और सरिया जैसी निर्माण सामग्री हासिल करने में कोई कठिनाई न हो। DBT के माध्यम से फंड सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजे जा रहे हैं ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके।

सड़कों का जाल: PMGSY-IV और बढ़ा हुआ बजट

ग्रामीण भारत को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत भी बड़े बदलाव किए गए हैं।

  • बजट विस्तार: कैबिनेट ने PMGSY-III के लिए बजट को 80,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 83,000 करोड़ रुपये कर दिया है।

  • नया चरण: PMGSY-IV के तहत 12,100 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए टेंडर (निविदा) की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है।

शुक्ला ने स्पष्ट किया कि वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों (RCPLWEA) के लिए सड़क परियोजनाओं के अधिकांश कार्यों को पहले ही हरी झंडी दी जा चुकी है। अब फोकस उन पुलों और सड़कों को जल्द पूरा करने पर है जो अभी भी लंबित हैं।

सिंचाई और कृषि: 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में PMKSY 2.0

ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत भूमि संसाधन विभाग प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY 2.0) को भी बड़े स्तर पर लागू कर रहा है। इसके तहत 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में काम चल रहा है। यह योजना विशेष रूप से बागवानी, चारागाह विकास और गहन कृषि को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। शुक्ला ने बताया कि कृषि मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है ताकि जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में कोई देरी न हो।

सरकार के इन तमाम कदमों से यह स्पष्ट है कि आगामी वर्षों में ग्रामीण बुनियादी ढांचे में भारी निवेश होने वाला है। बजट में 21% की बढ़ोतरी और DBT के जरिए पारदर्शी भुगतान से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। 2029 तक के लक्ष्यों को प्राप्त करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती जरूर है, लेकिन आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम और बढ़ी हुई फंडिंग से इसमें काफी उम्मीदें दिखाई दे रही हैं।

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