उत्तर प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से Yogi Adityanath सरकार ने एक अहम पहल की है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि गन्ना समितियों में महिलाओं को निःशुल्क स्थान उपलब्ध कराया जाएगा, जहां वे “प्रेरणा कैंटीन” खोलने के साथ-साथ अपने उत्पादों की बिक्री भी कर सकेंगी। इस कदम से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग और Uttar Pradesh State Rural Livelihood Mission के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) से जुड़ी महिलाओं को संगठित तरीके से रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके तहत महिलाएं गन्ना समितियों के परिसर में कैंटीन संचालन के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों की मार्केटिंग भी कर सकेंगी। गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. के अनुसार, मुख्यमंत्री की मंशा है कि प्रदेश की आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाया जाए। इसी सोच के तहत यह योजना लागू की जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा सकें। योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों को शुरुआती दो वर्षों तक किसी प्रकार का किराया नहीं देना होगा, जिससे वे बिना आर्थिक दबाव के अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। इसके अलावा, दो वर्ष की मोरेटोरियम अवधि समाप्त होने के बाद भी महिलाओं को राहत दी गई है। इसके तहत स्वयं सहायता समूहों को केवल 50 प्रतिशत किराया ही देना होगा, जो संबंधित जिले के सर्किल रेट के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। इससे महिलाओं पर आर्थिक बोझ कम रहेगा और वे अपने व्यवसाय को धीरे-धीरे मजबूत कर सकेंगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गन्ना समितियों में उपलब्ध कराए गए स्थान का स्वामित्व संबंधित समिति के पास ही रहेगा। इसे किसी भी स्वयं सहायता समूह या अन्य संस्था को हस्तांतरित नहीं किया जाएगा। इस व्यवस्था से सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और संसाधनों का सही उपयोग हो सकेगा।इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे स्थानीय उत्पादों को संगठित बाजार मिलेगा। ग्रामीण महिलाएं अपने हस्तशिल्प, खाद्य उत्पाद और अन्य सामग्री सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकेंगी। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
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