उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को Lakhimpur-Kheri के दौरे पर थे। यह दौरा सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि दशकों से अपने हक का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया। लखीमपुर के पलिया और मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान सीएम ने न केवल विकास परियोजनाओं का अंबार लगाया, बल्कि एक गांव का नाम बदलकर उसे नई पहचान भी दी।
राजनीति और समाज के नजरिए से यह दौरा बेहद खास रहा, क्योंकि यहाँ वर्षों से पहचान के संकट से जूझ रहे लोगों को आखिरकार अपनी जमीन का मालिकाना हक मिल गया। चलिए विस्तार से जानते हैं कि मुख्यमंत्री के इस दौरे में Lakhimpur-Kheri की जनता के लिए क्या-क्या खास रहा।

मियांपुर गांव का नाम अब होगा ‘रवींद्रनगर’
Lakhimpur-Kheri के मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र में स्थित मियांपुर गांव अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा और इसकी जगह ‘रवींद्रनगर’ नई पहचान बनेगा। सीएम योगी ने मियांपुर गांव का नाम बदलने का बड़ा ऐलान किया। यह गांव मुख्य रूप से उन 331 बंगाली हिंदू परिवारों का है जो दशकों पहले बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) से विस्थापित होकर यहाँ आए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “जिस गांव में एक भी ‘मियां’ नहीं रहता, उसका नाम मियांपुर रखना पिछली सरकारों की तुष्टीकरण की राजनीति थी।” उन्होंने घोषणा की कि अब इस बस्ती का नाम विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर ‘रवींद्रनगर’ होगा। सीएम ने इन परिवारों को उनकी जमीन के ‘भूमि अधिकार पत्र’ भी सौंपे, जिसका इंतजार ये लोग पिछले कई दशकों से कर रहे थे।

थारू जनजाति और स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को मिला हक
मुख्यमंत्री का दूसरा बड़ा पड़ाव पलिया था। यहाँ उन्होंने थारू जनजाति के 4356 परिवारों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के 2350 आश्रित परिवारों को जमीन के मालिकाना हक वाले कागजात बांटे। Lakhimpur-Kheri का यह क्षेत्र अपनी थारू संस्कृति के लिए जाना जाता है, लेकिन यहाँ के निवासी लंबे समय से अपनी ही जमीन पर कानूनी हक के लिए संघर्ष कर रहे थे।
करीब 5358 हेक्टेयर जमीन का मालिकाना हक अब इन थारू परिवारों के पास होगा। सीएम ने साफ कहा कि अब कोई भी विभाग या अधिकारी इन गरीब लोगों को परेशान नहीं कर पाएगा। यह कदम सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

माफिया राज पर सीएम का कड़ा रुख
भाषण के दौरान सीएम योगी का तेवर काफी सख्त नजर आया। उन्होंने माफियाओं को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि “अगर अब किसी ने भी उत्तर प्रदेश में माफिया बनने की सोची, तो उसे मिट्टी में मिला दिया जाएगा।” उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले Lakhimpur-Kheri को उसकी प्राकृतिक सुंदरता के बजाय वहां पनपे माफियाओं के नाम से जाना जाने लगा था।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार ने हर जिले में एक माफिया पैदा किया था, लेकिन आज का उत्तर प्रदेश दंगामुक्त और गुंडामुक्त है। जो माफिया बचे हैं, वे अब सुधर चुके हैं या प्रदेश छोड़ चुके हैं।

वन डिस्ट्रिक्ट-वन क्यूजिन: स्वाद को मिलेगी नई पहचान
विकास के मॉडल पर बात करते हुए सीएम ने एक नया कॉन्सेप्ट पेश किया—’वन डिस्ट्रिक्ट-वन क्यूजिन’ (One District-One Cuisine)। जैसे ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ (ODOP) के जरिए स्थानीय उत्पादों को पहचान मिली, वैसे ही अब हर जिले के मशहूर खाने-पीने की चीजों को प्रमोट किया जाएगा।
Lakhimpur-Kheri में बेकरी और स्थानीय मिठाइयों की काफी चर्चा हुई। सीएम ने मजाकिया लहजे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कहा कि यहाँ के बेकरी उत्पाद बहुत स्वादिष्ट हैं। उन्होंने उद्योगपतियों से अपील की कि वे यहाँ बेकरी प्लांट लगाएं ताकि थारू जनजाति के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। उन्होंने वादा किया कि सरकार इन प्रोडक्ट्स को इंटरनेशनल ब्रांड बनाने में पूरी मदद करेगी।
थारू परिवारों पर दर्ज पुराने मुकदमे होंगे वापस
एक और बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि थारू जनजाति के लोगों पर पिछली सरकारों के दौरान जितने भी ‘फर्जी’ मुकदमे दर्ज किए गए थे, सरकार उन्हें वापस लेगी। उन्होंने कहा कि संघर्ष के दिनों में इन लोगों की आवाज दबाने के लिए मुकदमे लादे गए थे, लेकिन अब समय न्याय का है। अब न तो पुलिस और न ही वन विभाग का कोई अधिकारी इन लोगों से अवैध वसूली या उत्पीड़न कर पाएगा।
सामाजिक समरसता और महापुरुषों का सम्मान
सीएम योगी ने यह भी बताया कि सरकार अब उन महापुरुषों की प्रतिमाओं और स्मारकों का सौंदर्यीकरण कराएगी जिन्होंने समाज को जोड़ने का काम किया है। इसमें बाबा साहब अंबेडकर, संत रविदास, ज्योतिबा फुले और महाराणा प्रताप जैसे नायकों के सम्मान में बनने वाले स्मारकों के लिए सरकार अलग से फंड जारी करेगी।
उन्होंने कहा कि Lakhimpur-Kheri और पूरे उत्तर प्रदेश में अब विकास का लाभ किसी एक परिवार या ‘सैफई’ तक सीमित नहीं है। अब 25 करोड़ की जनता ही हमारा परिवार है और विकास की योजनाएं हर गरीब की दहलीज तक पहुँच रही हैं।
विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात
इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने Lakhimpur-Kheri को 1311 करोड़ रुपये की 538 परियोजनाओं की सौगात दी। इसमें 356 करोड़ की लागत वाली 345 परियोजनाओं का लोकार्पण (उद्घाटन) हुआ और 955 करोड़ की 193 परियोजनाओं का शिलान्यास (नींव) रखा गया। इन परियोजनाओं में सड़कें, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं, जो आने वाले समय में जिले की तस्वीर बदल देंगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दौरा जिले के लिए केवल चुनावी नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण था। वर्षों से विस्थापित का दंश झेल रहे बंगाली परिवारों को ‘रवींद्रनगर’ के रूप में एक नई पहचान मिली, तो वहीं थारू समाज को अपनी ही जमीन पर कानूनी अधिकार मिला। विकास परियोजनाओं और ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन क्यूजिन’ जैसे नए विचारों से यह साफ है कि सरकार अब स्थानीय संसाधनों को वैश्विक मंच पर लाने की तैयारी में है। अगर ये योजनाएं धरातल पर सही से उतरती हैं, तो लखीमपुर-खीरी आने वाले समय में रोजगार और पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
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