दिन वह….अब दूर नहीं है….!

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पता नहीं क्यों…..?
उसने कह दिया….
कि मुझमें कोई सऊर नहीं है….
मान भी लिया आसानी से….
दुनियावालों ने इसको….क्योंकि….
सही-गलत का निर्णय करने का…
यहाँ किसी के पास भी…..!
समय भरपूर नहीं है….
पर इतना तो यक़ीन है मुझको कि…
दुनिया वालों ने ही उसे….
कुछ ऐसा ही समझाया होगा…
पाठ यही हर पल पढ़ाया होगा….
इसलिये मानता हूँ मैं यही….कि….
इसमें उसका…कोई कसूर नहीं है…
खूब मालूम है उसको….कि…
दुनिया में यार उसका….!
कत्तई मशहूर नही है….
लेकिन संग इसके जानती है…
ख़ूब अच्छे से वह यह भी…
कि…उसकी ही बंद आँखों में…!
कैद है….नाज़ुक यार उसका…
और….लाख कह ले दुनिया….पर…
यार उसका…..मफ़रूर नहीं है….
हुनर कमजोर हो सकता है मेरा…!
पर पता है उसको….यह कि….
प्यार से….पलायन का तो…..!
इस पगले के यहाँ,
कोई दस्तूर नहीं है…..
तमाम दगाबाजियाँ देखी है,
दुनिया भर में उसने….
पर….मुझे मालूम है यह कि…
वफादारी पर खुद की….!
वह कत्तई मगरूर नहीं है….
फ़िर आप ही बताओ मित्रों….
सौदा सस्ती मोहब्बत का….!
वह करेगी क्यों भला मुझसे….?
वह भी तब जबकि….!
मालूम इतना है उसको…कि…
यार उसका…दिहाड़ी मजदूर नहीं है
सुन सको तो….सुनो दुनियावालों….
वफा ही करेगी….मुझसे वह…
और…देखेगी सारी दुनिया….
यह मंजर एक दिन….
अटल विश्वास है यह मेरा….
क्योंकि किसी भी मोड़ पर….!
वह कत्तई मज़बूर नहीं है…
सच्चाई मेरे प्यार की यह….!
आप भी मान लो यारों…..
कि…मदहोश होकर….
मेरी आग़ोश में होगी वह…
दिन वह….अब दूर नहीं है….!
दिन वह….अब दूर नहीं है….!

रचनाकार…..
जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ

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