PMEGP: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय की प्रमुख योजना प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) आज देश भर में स्वरोजगार और जमीनी स्तर पर आर्थिक विकास का मुख्य आधार बन गई है। खादी और ग्राम उद्योग आयोग (KVIC) के माध्यम से संचालित इस कार्यक्रम ने अब तक लगभग 36.33 लाख लोगों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा कर आजीविका सृजन में ऐतिहासिक योगदान दिया है।
यह योजना नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने वाले उद्यमियों को बैंक ऋण पर मार्जिन मनी (सब्सिडी) प्रदान कर वित्तीय सहायता सुनिश्चित करती है।
15वें वित्त आयोग के दौरान शानदार प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान इस योजना ने निर्धारित लक्ष्यों को पीछे छोड़ते हुए बेहतरीन प्रदर्शन किया है:
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लक्ष्य से अधिक सफलता: योजना ने 4,02,000 उद्यमों के लक्ष्य के मुकाबले 4,03,706 सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना की।
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बजट का पूर्ण उपयोग: इस अवधि के दौरान आवंटित 13,554.42 करोड़ रुपये के बजट का पूरी तरह से प्रभावी उपयोग किया गया।
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रोजगार सृजन: लाखों नए सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से देश के सूक्ष्म उद्यम परितंत्र (Micro-Enterprise Ecosystem) को मजबूती मिली है।
समावेशी विकास: महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस
पीएमईजीपी योजना ने सामाजिक रूप से वंचित समुदायों और महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:
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महिला सशक्तिकरण: कुल सूक्ष्म उद्यमों में 40% महिला लाभार्थी हैं। साथ ही, कुल वितरित सब्सिडी का 45% हिस्सा महिला उद्यमियों को प्रदान किया गया है।
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सामाजिक समावेश: लाभार्थियों में लगभग 54% अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित हैं।
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ग्रामीण औद्योगीकरण: योजना के तहत स्थापित 80% उद्यम ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, जो संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा दे रहे हैं।
PMEGP: आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम
पीएमईजीपी ने पहली पीढ़ी के उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़कर विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में एक मजबूत आधार तैयार किया है। ऋण-संबंधी सब्सिडी तक आसान पहुंच सुनिश्चित करके इस योजना ने समावेशी आर्थिक विकास और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को धरातल पर उतारा है। यह कार्यक्रम न केवल व्यापार शुरू करने में मदद कर रहा है, बल्कि जमीनी स्तर पर भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है।
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