साहित्य

परीक्षा परिणाम…..! लेख – जितेन्द्र कुमार दुबे अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ

परीक्षा परिणाम…..! परीक्षा परिणामॉं को लेकर….! बालपन से आज तक…. उत्सुकता….रही ही रही है…. बालपन में पास होने की…. बचकानी सोच….और फिर कभी… टॉप करने की काल्पनिक सोच… बड़े होने पर….परीक्षा परिणाम में… श्रेणी-स्थान के साथ….! अखबार में नाम-फोटो देखने की… उत्सुकता बनी ही रहती थी नौकरी पाने के बाद भी मित्रों….! यह उत्सुकता आज

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माटी में लोट-लोटकर…..!

रोक थी पहले कभी…..! समंदर पार करने की…. भृकुटि लाल हो जाती सभी की, ऐसी बात और हरकतों पर…. दिन बिसार दिए गए वे अब…. पूछता है हर कोई यही….! कि तुम समुंदर पार करोगे कब…. बस अर्थ की चिंता….! सताती है यहाँ सभी को… प्रेम की भाषा सुनो, नहीं सुहाती है किसी को… समंदर

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दिन वह….अब दूर नहीं है….!

पता नहीं क्यों…..? उसने कह दिया…. कि मुझमें कोई सऊर नहीं है…. मान भी लिया आसानी से…. दुनियावालों ने इसको….क्योंकि…. सही-गलत का निर्णय करने का… यहाँ किसी के पास भी…..! समय भरपूर नहीं है…. पर इतना तो यक़ीन है मुझको कि… दुनिया वालों ने ही उसे…. कुछ ऐसा ही समझाया होगा… पाठ यही हर पल

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हर किसी को हमने

हर किसी को हमने……!

दुनिया भर के लोगों ने, दिन के उजाले में…. उसका मुस्कुराता मुखड़ा देखा… किसी ने क्या समझा…क्या पाया… मालूम नहीं मुझको….पर हाँ…! मैंने तो अक्सर ही….बंद कमरे में…. उसको खामोश रोते देखा….. ताउम्र तन्हाई में ही काटी जिंदगी मानो या ना मानो….सच है कि….. उसने तो यहाँ….न कोई शिकवा… न कोई गिला देखा…. साथ उसके

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