उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर राज्य की बदलती स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर साझा की। CM Yogi ने बताया कि राज्य अब उपचार की विवशता से निकलकर स्वास्थ्य सुरक्षा के विश्वास की ओर बढ़ चुका है। प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने वर्ष 2017 से पहले की लचर व्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए यूपी को स्वस्थ, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए हैं।
इस परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रमाण है कि जिस उत्तर प्रदेश की पहचान कभी वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया (One District, One Mafia) से होती थी, वही उत्तर प्रदेश आज वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज (One District, One Medical College) के संकल्प के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है।
मेडिकल कॉलेजों और MBBS सीटों में बड़ा उछाल
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में आए इस बड़े बदलाव का सबसे मजबूत प्रमाण मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के आंकड़े हैं। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि वर्ष 2017 में जहां प्रदेश के भीतर सरकारी और निजी मिलाकर कुल 36 मेडिकल कॉलेज ही उपलब्ध थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 85 तक पहुंच चुकी है।
इसी के साथ राज्य में एमबीबीएस की सीटें भी 4,690 से बढ़कर अब 13,600 से अधिक हो गई हैं। इसका सीधा फायदा प्रदेश के युवाओं को मिला है, जिनके लिए डॉक्टरी की पढ़ाई के दरवाजे खुले हैं। साथ ही, आम जनता को भी अपने जिले के पास ही बेहतर और आधुनिक इलाज की सुविधाएं मिलने लगी हैं।
10 करोड़ से अधिक लोगों को मिला स्वास्थ्य सुरक्षा कवच
प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को महंगे इलाज की चिंता से मुक्त करने के लिए आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना को काफी मुस्तैदी से लागू किया गया है। सीएम योगी के मुताबिक, वर्तमान में प्रदेश के 10 करोड़ से भी ज्यादा लोग इन योजनाओं के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आ चुके हैं। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज में होने वाले भारी आर्थिक बोझ से आम जनता को राहत मिली है और वे सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं।
गांव और ब्लॉक स्तर तक जांच और इलाज की आधुनिक सुविधाएं
सरकार का मुख्य फोकस केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहकर ग्रामीण और ब्लॉक स्तर तक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर रहा है। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों में डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, ब्लड स्टोरेज यूनिट्स और ऑक्सीजन प्लांट की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा क्रिटिकल केयर ब्लॉक और इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब की स्थापना से स्थानीय स्तर पर ही जांच और त्वरित इलाज संभव हो पा रहा है। इन प्रयासों से बड़े शहरों के बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम हुआ है और समय पर इलाज मिलना आसान हो गया है।