Abu Salem Supreme Court Petition: 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी गैंगस्टर अबू सलेम (Abu Salem) को अदालत से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सलेम की समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि सलेम की समय से पहले रिहाई का कोई आधार नहीं बनता।
क्या था सलेम का दावा और कोर्ट का फैसला?
सलेम ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि अंडरट्रायल अवधि और जेल में अच्छे व्यवहार के बदले मिलने वाली छूट (रेमिशन) को जोड़कर उसकी 25 साल की सजा पूरी हो चुकी है। इसलिए उसे तुरंत जेल से रिहा कर दिया जाना चाहिए। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस दावे को नहीं स्वीकार किया।
अदालत का मानना है कि भारत सरकार और पुर्तगाल के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि के तहत तय की गई 25 साल की अवधि एक मूल सजा है। इसे सामान्य जेल छूट के जरिए कम नहीं किया जा सकता। यानी सलेम को कानून के मुताबिक अपनी निर्धारित अवधि पूरी करनी होगी और उसकी सजा नवंबर 2030 में ही खत्म होगी।
1993 Mumbai blast और पुर्तगाल से प्रत्यर्पण का मामला
12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए 12 सिलसिलेवार बम धमाकों में 257 मासूम लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस भीषण साजिश में शामिल अबू सलेम वारदात के बाद भारत से भागकर पुर्तगाल चला गया था।
वर्ष 2002 में पुर्तगाल पुलिस ने उसे जाली पासपोर्ट मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद नवंबर 2005 में प्रत्यर्पण संधि के नियमों के तहत उसे भारत लाया गया। संधि की शर्तों के मुताबिक भारतीय अदालत ने उसे फांसी की सजा न देकर उम्रकैद की सजा सुनाई। फिलहाल सलेम नासिक रोड सेंट्रल जेल में अपनी सजा काट रहा है।







