ठाकुर श्री बांके बिहारी के दर्शन का समय क्यों नहीं बढ़ाया जा सकता? SC ने मंदिर के भगवान के आराम करने के सवाल पर दिया ये जवाब

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मथुरा जिले के वृंदावन स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी जी मंदिर में दर्शन का समय बढ़ाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम टिप्पणी की है। यह मामला न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ा है, बल्कि मंदिर प्रबंधन, परंपराओं और भगवान के विश्राम (आराम) के समय से जुड़े सवालों को भी सामने लाता है।

वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण के तीन प्रमुख स्वरूप अलग-अलग मंदिरों में विराजमान हैं, जिनमें ठाकुर श्री बांके बिहारी जी का मंदिर सबसे अधिक भीड़ वाला माना जाता है। यहां रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई बार अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ जैसे हालात बन चुके हैं और पूर्व में जानमाल के नुकसान की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।

दर्शन समय बढ़ाने का मामला क्यों उठा?

मंदिर परिसर की सीमित जगह, बढ़ती भीड़ और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने मंदिर में दर्शन का समय प्रतिदिन करीब दो घंटे 30 मिनट तक बढ़ाने का फैसला किया। समिति का मानना था कि दर्शन समय बढ़ने से भीड़ का दबाव कम होगा और अव्यवस्था की स्थिति से बचा जा सकेगा।

हालांकि, इस फैसले का मंदिर के सेवायतों और प्रबंधन समिति ने विरोध किया। उनका कहना है कि बांके बिहारी जी के दर्शन, भोग और शयन की परंपराएं सदियों पुरानी हैं, जिनमें बदलाव नहीं किया जा सकता।

सेवायतों का तर्क: भगवान के आराम का समय तय है

मंदिर की प्रबंधन समिति की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि दर्शन का समय बढ़ाने से भगवान से जुड़े अन्य कार्यों का समय भी प्रभावित होता है। उनका कहना है कि ठाकुर जी के शयन भोग और विश्राम का एक निश्चित समय होता है, जिसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।

सेवायतों के अनुसार, भगवान के आराम का समय धार्मिक परंपरा का हिस्सा है और इसे प्रशासनिक सुविधा के नाम पर बदला नहीं जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सेवायतों की इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने सवाल उठाया कि भगवान के आराम के समय वास्तव में उन्हें आराम कहां मिलता है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा,
“जिस समय आम श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति नहीं होती, उसी समय प्रभावशाली लोग बड़ी रकम देकर पूजा करते हैं। उन्हें विशेष पूजा की इजाजत होती है। ऐसे में यह कहना कि दर्शन बढ़ाने से भगवान के आराम में बाधा आएगी, इस पर सवाल उठते हैं।”

कोर्ट की इस टिप्पणी को आम श्रद्धालुओं के पक्ष में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

पूरा मामला क्या है?

इस साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन स्थित बांके बिहारी जी महाराज मंदिर के दैनिक प्रशासन और संचालन की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक कुमार कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने यह समिति उस समय गठित की थी, जब यूपी सरकार द्वारा लाए गए बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 के तहत बनी समिति के संचालन को निलंबित कर दिया गया था। साथ ही, अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाला मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट को भेज दिया गया था।

हाईकोर्ट के अंतिम फैसले तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित यह उच्चस्तरीय समिति ही मंदिर के प्रशासन और संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही है।

आज की सुनवाई किस याचिका पर हुई?

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मंदिर की प्रबंधन समिति की ओर से शयन भोग सेवा से जुड़े गोपेश गोस्वामी और रजत गोस्वामी द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। इस याचिका में दर्शन समय बढ़ाए जाने के फैसले पर आपत्ति जताई गई थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि दर्शन समय में बदलाव से मंदिर की धार्मिक परंपराएं प्रभावित होंगी, जबकि समिति का तर्क श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ा है।

श्रद्धालुओं के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

बांके बिहारी मंदिर में रोजाना लाखों श्रद्धालु दर्शन की इच्छा लेकर पहुंचते हैं, लेकिन सीमित समय और जगह के कारण कई लोग बिना दर्शन लौटने को मजबूर हो जाते हैं। दर्शन समय बढ़ाए जाने से आम श्रद्धालुओं को राहत मिलने की उम्मीद है और वीआईपी संस्कृति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से यह साफ संकेत मिला है कि अदालत इस मुद्दे को केवल परंपरा बनाम प्रशासन के तौर पर नहीं, बल्कि समानता और पारदर्शिता के नजरिये से भी देख रही है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट क्या अंतिम दिशा तय करता है और क्या वास्तव में ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के दर्शन का समय बढ़ाया जाएगा या नहीं।

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