Sarnath UNESCO World Heritage : सारनाथ बना यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, भारत को मिली 45वीं वर्ल्ड हेरिटेज साइट

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Sarnath UNESCO World Heritage : उत्तर प्रदेश और पूरे देश के लिए एक बहुत ही गर्व और खुशी की खबर आई है। लंबे समय से इंतजार कर रहे वाराणसी के ऐतिहासिक स्थल सारनाथ को यूनेस्को (UNESCO) ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दे दिया है। कोरिया के बुसान शहर में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र के दौरान यह फैसला लिया गया, जिसकी आधिकारिक घोषणा पेरिस मुख्यालय से की गई। इसके साथ ही सारनाथ अब भारत की 45वीं विश्व धरोहर संपत्ति बन गया है। आइए जानते हैं कि इस फैसले का वाराणसी और भारत के लिए क्या महत्व है।

भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली का महत्व

सारनाथ का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बौद्ध धर्म के इतिहास में सबसे खास माना जाता है। यही वह पवित्र पावन धरती है जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। यहां स्थित धम्मेक स्तूप बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे बड़े आस्था के केंद्रों में से एक है, जिसका निर्माण तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने कराया था। इसके अलावा चौखंडी स्तूप और सारनाथ संग्रहालय भी प्राचीन बौद्ध कला और भारतीय संस्कृति की अद्भुत झलक पेश करते हैं।

वाराणसी पर्यटन और स्थानीय विकास को मिलेगी नई ऊंचाई

वाराणसी को पहले से ही यूनेस्को द्वारा ‘सिटी ऑफ म्यूजिक’ का दर्जा प्राप्त है। अब सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने से बनारस को वैश्विक स्तर पर बौद्ध धर्म के एक बड़े और प्रतिष्ठित केंद्र के रूप में और मजबूत पहचान मिलेगी। इस फैसले से क्षेत्र में पर्यटन को बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा। जब दुनिया भर से लाखों बौद्ध अनुयायी और पर्यटक यहां आएंगे, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को इसके संरक्षण के लिए अतिरिक्त अधिकार और संसाधन भी मिलेंगे।

Sarnath UNESCO World Heritage
Sarnath UNESCO World Heritage

वैश्विक मंच पर शांति और अहिंसा का संदेश

यूनेस्को में भारत के प्रतिनिधिमंडल ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संस्कृति मंत्रालय और ASI की टीम का आभार व्यक्त किया। सारनाथ दुनिया भर के 50 करोड़ से अधिक बौद्ध अनुयायियों के लिए शांति, चिंतन और अध्यात्म का केंद्र है। भगवान बुद्ध के अहिंसा, सत्य और सचेत जीवन जीने के संदेश आज भी पूरी दुनिया को सही राह दिखाते हैं। इस फैसले के बाद भारत में कुल 45 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हो गए हैं, जिनमें 37 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित स्थल शामिल हैं।

सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलना हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। यह निर्णय न केवल उत्तर प्रदेश की समृद्ध और ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाता है, बल्कि हमारी प्राचीन धरोहरों के बेहतर संरक्षण का मार्ग भी प्रशस्त करता है। अब सारनाथ दुनिया के मानचित्र पर और अधिक चमक के साथ उभरेगा और आने वाली पीढ़ियों को भारत की गौरवशाली संस्कृति से जोड़ता रहेगा।

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