भारतीय खेल प्रेमियों के लिए रविवार का दिन बेहद खास और ऐतिहासिक रहा। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु (PV Sindhu) ने कोर्ट पर अपनी पुरानी चमक बिखेरते हुए Japan Open टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने खिताबी मुकाबले में अपनी विपक्षी खिलाड़ी को सीधे गेमों में धूल चटाकर बैडमिंटन की दुनिया में एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया है। इस जीत के साथ ही सिंधु ने उन आलोचकों को भी करारा जवाब दिया है जो लंबे समय से उनकी फॉर्म और फिटनेस पर सवाल उठा रहे थे।
मेजबान खिलाड़ी को दी करारी शिकस्त
Japan में खेले गए इस बड़े टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में PV Sindhu का सामना घरेलू स्टार Akane Yamaguchi से था। पूरे मैच के दौरान सिंधु बेहद आक्रामक और सधे हुए अंदाज में खेलती नजर आईं। उन्होंने विमेंस सिंगल्स खिताब जीत लिया है और वह भी केवल 50 मिनट के भीतर। सिंधु ने जापानी खिलाड़ी यामागुची को सीधे गेमों में 21-17, 21-17 से हराकर इस टूर्नामेंट की ट्रॉफी अपने नाम की।
बैडमिंटन इतिहास में दर्ज कराया नाम
इस जीत का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि PV Sindhu जापान ओपन जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन प्लेयर हैं। इससे पहले भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में किसी भी पुरुष या महिला खिलाड़ी ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के किसी भी वर्ग में स्वर्ण पदक नहीं जीता था। सिंधु न सिर्फ इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनीं, बल्कि उन्होंने पहली ही बार में चैंपियन बनने का गौरव भी हासिल कर लिया।
लंबे समय बाद मिली बड़ी कामयाबी
सिंधु के करियर के लिहाज से देखें तो इस जीत ने उनके ऊपर से एक बड़ा दबाव कम कर दिया है। उन्होंने इस खिताबी जीत के साथ ही अपने करियर का 19 महीने का सूखा किया खत्म। इससे पहले उन्होंने आखिरी बार दिसंबर 2024 में सैयद मोदी इंटरनेशनल टूर्नामेंट जीता था। साल 2019 में विश्व चैंपियन बनने के बाद सिंधु का यह पहला सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब है, जो उनके आत्मविश्वास को दोबारा सातवें आसमान पर ले जाएगा।
कड़ी प्रतिद्वंद्विता में मारी बाजी
पीवी सिंधु और अकाने यामागुची के बीच यह करियर की 30वीं भिड़ंत थी। इस जीत के बाद अब सिंधु का पलड़ा भारी हो गया है, जिसमें उन्होंने 16 मैचों में जीत दर्ज की है। इससे पहले सेमीफाइनल में भी सिंधु ने शानदार खेल दिखाया था, जहां उनका मुकाबला चीनी खिलाड़ी और ओलंपिक चैंपियन चेन युफेई से था। हालांकि युफेई हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण मैच पूरा नहीं कर पाई थीं, लेकिन सिंधु ने पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह का संयम और आक्रामकता दिखाई, वह काबिले तारीफ है।





