Muzaffarnagar: कांवड़ यात्रा बनी भाईचारे की मिसाल, हिंदू-मुस्लिम दोस्ती ने जीता दिल | Kanwar Yatra

Muzaffarnagar

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कांवड़ यात्रा के दौरान जहां एक ओर सड़कों पर भगवान भोलेनाथ के जयकारे गूंज रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के Muzaffarnagar में सामाजिक सौहार्द और आपसी प्रेम का एक सुंदर दृश्य सामने आया है। यहां मेरठ के रहने वाले एक मुस्लिम युवक शाकिर अपने हिंदू दोस्त मिंटू के साथ 251 लीटर की भारी कांवड़ लेकर हरिद्वार से अपने गंतव्य की ओर बढ़ते दिखाई दिए। दोनों की यह गहरी दोस्ती और आस्था का संगम रास्ते से गुजरने वाले हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

दोस्ती और सेवा भाव का अनोखा संगम

शाकिर केवल अपने मित्र का साथ देने के लिए यात्रा नहीं कर रहे हैं, बल्कि रास्ते में मिलने वाले अन्य शिवभक्त कांवड़ियों की सेवा में भी बराबर योगदान दे रहे हैं। वह कभी कांवड़ को संभालने में मदद करते हैं तो कभी थक चुके यात्रियों को पानी और अन्य जरूरत की चीजें पहुंचाते हैं। आपको बता दें कि यह पहला मौका नहीं है, दोनों दोस्त लगातार दूसरी बार एक साथ हरिद्वार से कांवड़ उठाकर पदयात्रा कर रहे हैं।

जात-पात छोड़ो, इंसानियत को जोड़ो का संदेश

मिंटू और शाकिर का मानना है कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और सच्ची दोस्ती किसी मजहब या जाति की सीमाओं में नहीं बंधती। अपनी इस यात्रा के जरिए दोनों समाज को “जात-पात छोड़ो, इंसानियत को जोड़ो” का स्पष्ट संदेश दे रहे हैं।

जब दोनों मुजफ्फरनगर की सीमाओं से गुजरे, तो राहगीरों और अन्य श्रद्धालुओं ने उनकी इस पहल का खुलकर स्वागत किया। लोगों में उनके साथ तस्वीरें और वीडियो लेने की होड़ लग गई। कई स्थानीय लोगों ने इसे गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बताया। यह यात्रा साबित करती है कि अगर इरादे नेक हों और आपसी सम्मान हो, तो समाज में हमेशा शांति और भाईचारे का माहौल बना रह सकता है।

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