Dr APJ Abdul Kalam death anniversary: भारत के पूर्व राष्ट्रपति, ‘Missile Man of India’ और ‘भारत रत्न’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। नेताओं ने विज्ञान, रक्षा, अंतरिक्ष और राष्ट्र निर्माण में डॉ. कलाम के अद्वितीय योगदान को याद करते हुए उनकी सादगी और दूरदर्शी सोच को नमन किया। आइए जानते हैं कि इस खास मौके पर देश के प्रमुख नेताओं ने मिसाइल मैन को किस तरह याद किया।
पूर्व राष्ट्रपति के वैज्ञानिक और रक्षा क्षेत्र में योगदान को किया याद
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने डॉ. कलाम के रक्षा व अंतरिक्ष क्षेत्र में दिए योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने और स्वदेशी मिसाइल तकनीक से देश को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पहचान दिलाने में डॉ. कलाम का योगदान अभूतपूर्व रहा है। वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को आत्मनिर्भर भारत का सशक्त माध्यम बनाया।
सादगीपूर्ण जीवन और अटूट राष्ट्रसेवा की मिसाल
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने डॉ. कलाम के सादगी भरे जीवन की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम का जीवन उच्च विचारों, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा का सबसे बड़ा उदाहरण था। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कहा कि देश के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता और देशवासियों में उनका अटूट विश्वास हमेशा याद रखा जाएगा।
युवाओं के प्रेरणास्रोत के रूप में हमेशा अमर रहेंगे कलाम
सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एक स्वर में कहा कि डॉ. कलाम का जीवन हर भारतीय और खासकर देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत है। उन्होंने हर बच्चे को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की सीख दी। उनके विचार, आदर्श और राष्ट्र को समर्पित जीवन हमेशा आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे और उन्हें देश सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सिर्फ एक वैज्ञानिक या राष्ट्रपति ही नहीं थे, बल्कि वे हर भारतीय के दिल में बसने वाले एक सच्चे जन-नेता थे। उनकी पुण्यतिथि पर देशवासियों और नेताओं द्वारा दी जा रही यह श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि उनके विचार और आदर्श आज भी हमारे बीच उतने ही जीवित हैं। आइए, इस अवसर पर हम सब उनके बताए रास्ते पर चलने और भारत को एक सशक्त व आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने का संकल्प लें।







