लोनी में धूमधाम से मनाया गया उत्तराखंड स्थापना दिवस, उमड़ा जनसैलाब

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लोनी, गाज़ियाबाद। लोनी नगर पालिका क्षेत्र के रामपार्क विस्तार स्थित शिव मंदिर प्रांगण में रविवार को उत्तरांचल सांस्कृतिक भ्राता समिति के तत्वावधान में उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस उत्साहपूर्वक और गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों सहित उत्तराखंड मूल के परिवारों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्री मनोज धामा रहे। मंच पर पहुंचने पर समिति पदाधिकारियों ने उनका पारंपरिक ढोल-नगाड़ों, पुष्पमालाओं और स्वागत गीतों के साथ अभिनंदन किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री धामा ने कहा कि हिमालय की गोद में स्थित उत्तराखंड देवभूमि होने के कारण विश्व की सबसे पवित्र भूमि मानी जाती है। उन्होंने कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ, हरिद्वार, ऋषिकेश, धारी देवी और गोल्ज्यू देवता जैसे अनगिनत पवित्र तीर्थों की उपस्थिति के कारण उत्तराखंड आस्था और आध्यात्मिकता का केंद्र है। श्री धामा ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति, शांत वातावरण, अतिथि सत्कार और पारंपरिक भोजन विश्व भर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। उन्होंने लोनी क्षेत्र में बड़ी संख्या में निवास कर रहे उत्तराखंडी समाज को क्षेत्र की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक शक्ति बताया।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों सहित विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने उत्तराखंडी लोक नृत्य, गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें दर्शकों ने सराहनीय बताया। मुख्य अतिथि श्री मनोज धामा ने मंच पर सभी प्रतिभागी बच्चों को मेडल और ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया।

समारोह के अंत में समिति पदाधिकारियों ने मुख्य अतिथि को पारंपरिक उत्तराखंडी टोपी, स्मृति चिह्न और पटका भेंट कर सम्मान दिया। इस आयोजन में समिति अध्यक्ष श्री जयेन्द्र नेगी, उपाध्यक्ष श्री ठाकुर सिंह राणा, महासचिव श्री यशपाल नेगी, श्री राजेंद्र सिंह रावत, श्री शंकर सिंह बिष्ट, श्री संतोष चौहान, श्री देवेंद्र नेगी, श्री हरेंद्र पटवाल, श्री मोहन सिंह बिष्ट, श्री तोताराम भंडारी, श्री कपिल मलिक सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे।

कार्यक्रम देर शाम तक जारी रहा और पूरे पंडाल में उत्तराखंडी लोकगीतों, सांस्कृतिक संगीत और पारंपरिक नृत्यों की प्रतिध्वनि सुनाई देती रही।

लेख (सौजन्य से.): डॉ मंगलेश्वर भरतराज त्रिपाठी

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