Indian Railways : भारतीय रेलवे ने यात्रियों के सफर को और ज्यादा सुरक्षित और चिंतामुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रेलवे अब अपनी अत्याधुनिक स्वदेशी सुरक्षा तकनीक ‘कवच 4.0’ का दायरा तेजी से बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में नॉर्दर्न रेलवे के मुरादाबाद डिविजन के बचे हुए 712 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0 सिस्टम लगाने के लिए 170 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की गई है।
सरकार का मानना है कि इस आधुनिक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम के लग जाने से ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा की एक अभेद्य परत जुड़ जाएगी। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है और इससे रेल हादसों में कितनी कमी आई है।
क्या है कवच 4.0 और यह कैसे टालता है हादसे?
कवच भारत में ही पूरी तरह विकसित किया गया एक ‘ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम’ (ATP) है। यह ट्रेन के लोको पायलट (ड्राइवर) की मदद के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। अगर किसी वजह से ड्राइवर लाल सिग्नल देखने में चूक जाता है या ट्रेन की रफ्तार तय सीमा से ज्यादा हो जाती है, तो कवच तुरंत हरकत में आ जाता है।
यह सिस्टम इमरजेंसी की स्थिति में अपने आप ट्रेन के ब्रेक लगा देता है, जिससे दो ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर और सिग्नल ओवरशूट (रेड सिग्नल पार करना) जैसी गंभीर गलतियों को होने से रोका जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य मानवीय चूक के कारण होने वाली दुर्घटनाओं के जोखिम को पूरी तरह खत्म करना है।
पिछले 10 सालों में रेल हादसों में आई 88 फीसदी की गिरावट
रेल मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ वर्षों में रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार हुआ है। साल 2014-15 में जहां देश में 135 ट्रेन हादसे दर्ज किए गए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर केवल 16 रह गई है। यानी रेल हादसों में लगभग 88 प्रतिशत की बड़ी कमी आई है।
इसके अलावा, प्रति 10 लाख किलोमीटर पर हादसों की दर मापने वाले ‘कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स’ में भी 91 फीसदी का सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2026-27 के शुरुआती महीनों (जून तक) में देश भर में केवल दो रेल हादसे दर्ज हुए हैं, जो बेहतर होती सुरक्षा व्यवस्था की गवाही देते हैं।
रेलवे सुरक्षा के बजट में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी
सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारतीय रेलवे ने अपने बजट आवंटन में भी कई गुना बढ़ोतरी की है। साल 2013-14 में जहां रेलवे सुरक्षा कार्यों पर 39,200 करोड़ रुपये खर्च किए जाते थे, वहीं 2026-27 के बजट में इसे बढ़ाकर 1,20,389 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
इसके साथ ही देश के 6,671 से अधिक स्टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और ट्रैक सर्किटिंग सिस्टम लगाया जा चुका है। यही नहीं, 10,395 से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग (रेलवे फाटक) को भी इंटरलॉकिंग सिस्टम से जोड़ दिया गया है ताकि इंसानी चूक की कोई गुंजाइश न रहे।
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