India-Afghanistan : भारत ने एक बार फिर अफगानिस्तान के लोगों के लिए मानवीय मदद भेजी है। भारत की ओर से जीवन रक्षक दवाइयों और जरूरी चिकित्सा सामग्री की एक नई खेप काबुल पहुंची है। विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है। मंत्रालय ने कहा कि अफगानिस्तान के लोगों के लिए भारत की मानवीय सहायता लगातार जारी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत से भेजी गई नई खेप में काबुल के एक सरकारी अस्पताल के लिए जरूरी दवाइयां और मेडिकल सामग्री शामिल है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भारत का फोकस
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अफगानिस्तान को दी जा रही मानवीय मदद में स्वास्थ्य सेवाओं को हमेशा प्राथमिकता दी गई है। भारत का कहना है कि दवाइयों और चिकित्सा सामग्री की मदद का उद्देश्य वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना और आम लोगों को जरूरी इलाज उपलब्ध कराने में सहायता करना है। पिछले कुछ महीनों में भी भारत की ओर से अफगानिस्तान को कई खेपों में दवाइयां और चिकित्सा सामग्री भेजी गई हैं।
अगस्त में सरकारी अस्पताल को भेजी थी दवाइयां
20 अगस्त को भारत ने काबुल स्थित एक सरकारी अस्पताल को जीवन रक्षक दवाइयों और चिकित्सा सामग्री की खेप भेजी थी। इसके अलावा सितंबर की शुरुआत में मलेरिया, डेंगू और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों से निपटने के लिए 16 मीट्रिक टन से ज्यादा दवाइयां और डायग्नोस्टिक किट्स अफगानिस्तान भेजे गए थे। भारत की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि मानवीय सहायता का उद्देश्य अफगानिस्तान के आम लोगों की मदद करना और वहां स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में सहयोग देना है।
भारत ने जून में भी काबुल को करीब पांच टन जरूरी दवाइयां भेजी थीं। इससे पहले 22 मई को भारत की ओर से 20 टन बीसीजी और टेटनस एवं डिप्थीरिया (TD) वैक्सीन से जुड़ी जरूरी सामग्री भेजी गई थी। इस मदद का उद्देश्य अफगानिस्तान में बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूत करने में सहयोग करना था।
अफगानिस्तान के साथ संबंधों पर भारत का जोर
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और अफगानिस्तान के संबंध लंबे समय से चले आ रहे हैं। पिछले एक साल के दौरान दोनों देशों के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ा है। इसमें कूटनीतिक बातचीत के साथ मानवीय सहायता और विकास से जुड़े सहयोग को भी शामिल किया गया है। भारत का कहना है कि आगे भी अफगानिस्तान के साथ उसके सहयोग में मानवीय सहायता, स्वास्थ्य और विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी।

