Himachal पंचायत चुनाव पर अहम बैठक कल, चुनाव की रूपरेखा तय करेगा राज्य निर्वाचन आयोग

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हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में पंचायत चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) 20 जनवरी को एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहा है। यह बैठक हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के तहत बुलाई गई है, जिसमें पंचायत चुनाव 30 अप्रैल से पहले कराने और 28 फरवरी तक आरक्षण रोस्टर तथा मतदाता सूची की पूरी प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यह बैठक पंचायत चुनावों के कार्यक्रम निर्धारण की दिशा में निर्णायक साबित होगी।

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से यह बैठक ऐसे समय बुलाई गई है, जब प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के वर्तमान प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होने जा रहा है।

उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत बैठक

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पंचायत चुनाव तय समय सीमा में कराए जाएं। इसके तहत 28 फरवरी तक आरक्षण रोस्टर तैयार करने और मतदाता सूचियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, ताकि 30 अप्रैल से पहले चुनाव संपन्न कराए जा सकें। इन्हीं निर्देशों के अनुपालन को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ यह उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है।

किन अधिकारियों को बुलाया गया है ?

इस बैठक की अध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची करेंगे। बैठक में प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) के.के. पंत, प्रधान सचिव शहरी विकास और पंचायती राज विभाग के सचिव को सुबह 11 बजे उपस्थित रहने को कहा गया है। हालांकि बैठक से पहले पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पाल रासु के लंबे अवकाश पर चले जाने से विभाग की ओर से अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में हिस्सा लेंगे।

पंचायत चुनाव की रूपरेखा पर होगा निर्णय

मंगलवार को होने वाली इस बैठक में पंचायत चुनाव की संपूर्ण रूपरेखा, संभावित कार्यक्रम और प्रशासनिक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसमें यह तय किया जाएगा कि आरक्षण प्रक्रिया, मतदाता सूची का प्रकाशन, नामांकन, मतदान और मतगणना जैसी सभी गतिविधियां किस समयसीमा में पूरी की जाएंगी।

पंचायतों में बदलाव को लेकर मतभेद

सूत्रों के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग पंचायतों के ढांचे में किसी भी बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं है। आयोग का स्पष्ट मत है कि केवल जिला परिषद वार्डों में ही सीमित बदलाव किया जाए। वहीं, राज्य सरकार नई पंचायतों के गठन और मौजूदा पंचायतों के पुनर्गठन की इच्छुक बताई जा रही है। इस मुद्दे पर सरकार और आयोग के बीच मतभेद की स्थिति बनी हुई है।

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