Dhar Bhojshala परिसर को घोषित किया ‘वाग्देवी मंदिर’: इंदौर हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को…

Dhar Bhojshala

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इंदौर/धार: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और बहुचर्चित Dhar Bhojshala विवाद में शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक युगांतकारी और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की सदियों पुरानी मांग और दावों को पूरी तरह स्वीकार करते हुए विवादित भोजशाला परिसर को आधिकारिक तौर पर ‘हिंदू मंदिर’ घोषित कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह परिसर मूल रूप से मां वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्राचीन केंद्र है।

इस ऐतिहासिक फैसले के तहत कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष और जैन समाज की तरफ से दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। साथ ही, परिसर में नमाज पढ़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अदालत के इस निर्णय के बाद हिंदू समाज में उत्साह की लहर है, जबकि सुरक्षा के लिहाज से धार और इंदौर में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

इंदौर हाईकोर्ट के फैसले की 8 बड़ी बातें

  • 1. सरस्वती मंदिर होने के पुख्ता साक्ष्य: हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट तौर पर माना कि Dhar Bhojshala परिसर के भीतर मां सरस्वती मंदिर और प्राचीन संस्कृत शिक्षा केंद्र होने के अकाट्य वैज्ञानिक और ऐतिहासिक साक्ष्य पाए गए हैं।

  • 2. पूजा की परंपरा कभी खत्म नहीं हुई: माननीय न्यायालय ने रेखांकित किया कि इस पवित्र स्थान पर सदियों से हिंदुओं द्वारा पूजा-अर्चना की परंपरा अनवरत रूप से जारी रही है, जिसे सीमित नहीं किया जा सकता।

  • 3. अयोध्या केस और एएसआई सर्वे बना आधार: इंदौर हाईकोर्ट ने अपने इस फैसले तक पहुंचने के लिए हाल ही में हुए 98 दिनों के एएसआई (ASI) के वैज्ञानिक सर्वेक्षण, ऐतिहासिक तथ्यों और देश के प्रतिष्ठित ‘अयोध्या मामले’ के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कानूनी आधार माना है।

  • 4. एएसआई का 2003 का आदेश रद्द: कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा साल 2003 में जारी उस विवादित आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है, जो हिंदुओं के पूजा के अधिकारों को सीमित करता था और जिसके तहत मुस्लिमों को वहां नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी।

  • 5. परिसर के प्रबंधन का जिम्मा केंद्र और एएसआई को: अदालत ने केंद्र सरकार और एएसआई को निर्देश दिया है कि वे मिलकर Dhar Bhojshala परिसर के भविष्य के सुचारू संचालन, प्रबंधन और व्यवस्था को लेकर अंतिम निर्णय लें। एएसआई इस पूरे स्मारक का संरक्षण और देखरेख जारी रखेगा।

  • 6. गर्भगृह और देव प्रतिमाओं की सुरक्षा: कोर्ट ने कहा कि देश के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाले प्राचीन स्मारकों की सुरक्षा निश्चित करना हर सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। सरकार को गर्भगृह और धार्मिक आस्था से जुड़ी देव प्रतिमाओं का पूर्ण संरक्षण करना होगा।

  • 7. लंदन से वापस आएगी मां वाग्देवी की मूर्ति?: हिंदू पक्ष की ओर से लंबे समय से मांग की जा रही है कि लंदन के संग्रहालय (Museum) में रखी मां वाग्देवी की मूल मूर्ति को वापस भारत लाकर Dhar Bhojshala में स्थापित किया जाए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार कानून के दायरे में इस मांग पर सकारात्मक विचार कर सकती है।

  • 8. मुस्लिम पक्ष को अलग जमीन देने का निर्देश: माननीय अदालत ने मुस्लिम पक्ष को झटका देने के साथ ही एक विकल्प भी दिया है। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम समुदाय चाहे तो धार जिले में किसी दूसरी जगह पर मस्जिद निर्माण के लिए सरकार से जमीन की मांग कर सकता है, और सरकार कानून के अनुसार उस आवेदन पर विचार कर सकती है।

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क्या है Dhar Bhojshala विवाद? (इतिहास और घटनाक्रम)

Dhar Bhojshala का यह विवाद मुख्य रूप से हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के बीच दशकों से चला आ रहा था।

  • पक्षों के दावे: हिंदू पक्ष का हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि यह परिसर परमार वंश के राजा भोज द्वारा स्थापित मां सरस्वती (वाग्देवी) का साक्षात मंदिर है। इसके विपरीत, मुस्लिम पक्ष इसे ‘कमाल मौला की मस्जिद’ होने का दावा करता आया था।

  • तनाव का केंद्र: इस स्थान पर धार्मिक स्वरूप को लेकर समाज और कोर्ट दोनों स्तरों पर लंबी बहस चली। विशेष रूप से प्रतिवर्ष वसंत पंचमी के दिन यहां पूजा-पाठ को लेकर अक्सर सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन जाती थी।

  • कानूनी मोड़: साल 2022 में ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की ओर से हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई, जिसमें भोजशाला का वास्तविक धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदुओं को इसका पूर्ण स्वामित्व सौंपने की गुहार लगाई गई।

  • ASI का वैज्ञानिक सर्वे: हाईकोर्ट के आदेश पर साल 2024 में एएसआई (ASI) की टीम ने आधुनिक तकनीकों के सहारे पूरे 98 दिनों तक भोजशाला परिसर का चप्पा-चप्पा छाना और एक विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट अदालत को सौंपी। इसी साल 23 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने वसंत पंचमी पर दिनभर पूजा की विशेष अनुमति दी थी, जिसके बाद 6 अप्रैल 2026 से हाईकोर्ट में इस पर नियमित अंतिम सुनवाई शुरू हुई जो 12 मई तक चली।

फैसले के बाद धार में 12 लेयर की सुरक्षा, छावनी में बदला इलाका

हाईकोर्ट का फैसला सामने आने के बाद, धार जिला प्रशासन और पुलिस बेहद सतर्क हैं। शुक्रवार को अमूमन मुस्लिम समाज वहां जुमे की नमाज अदा करता था, जिसे देखते हुए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।

धार के पुलिस अधीक्षक (SP) सचिन शर्मा स्वयं मोर्चे पर डटे हुए हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि पूरे धार शहर और संवेदनशील इलाकों में 12 लेयर (स्तरों) का सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। जिलेभर से करीब 1200 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा केंद्रीय सुरक्षा बलों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कंपनियों को भी संवेदनशील पॉइंट पर तैनात कर फ्लैग मार्च कराया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है मुस्लिम पक्ष

इधर, इंदौर हाईकोर्ट के इस बड़े झटके के बाद मुस्लिम पक्षकारों की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनके विधिक सलाहकार और वकील पहले हाईकोर्ट के इस विस्तृत फैसले की बारीकी से समीक्षा करेंगे। यदि उन्हें कानूनी रूप से इसमें कोई त्रुटि नजर आती है, तो वे इस फैसले को चुनौती देने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का रुख करेंगे।

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