China Nuclear Missile : दुनिया का ध्यान जब एक तरफ लगा होता है, तो दूसरी तरफ अक्सर कुछ बड़ा घट जाता है। हाल ही में कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच चीन ने चुपचाप समुद्र के भीतर अपनी बड़ी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर दिया। जब अमेरिका का पूरा फोकस ईरान के साथ जारी गतिरोध पर बना हुआ था, ठीक उसी समय चीन ने अपनी पनडुब्बी से एक परमाणु-सक्षम मिसाइल का सफल परीक्षण कर पूरे प्रशांत क्षेत्र को चिंता में डाल दिया है।
वैश्विक उथल-पुथल के बीच बड़ा सैन्य कदम
एशिया मीडिया सेंटर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के इस मिसाइल परीक्षण पर दुनिया का जितना ध्यान जाना चाहिए था, उतना नहीं जा सका। इसका मुख्य कारण यह रहा कि अमेरिका पिछले कई महीनों से मध्य पूर्व में ईरान के साथ जारी संघर्ष में पूरी तरह उलझा हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों और सैन्य कार्रवाई के चलते वाशिंगटन की कूटनीतिक और सैन्य ताकत का बड़ा हिस्सा वहीं केंद्रित है। इसी व्यस्तता का लाभ उठाकर या यूं कहें कि सही समय देखकर चीन ने अपने इस परीक्षण को अंजाम दिया।
क्या यह सिर्फ एक रूटीन अभ्यास है?
हालांकि चीन का दावा है कि यह उसका एक सामान्य और सालाना सैन्य अभ्यास था, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना कुछ और ही है। रिपोर्ट में रणनीतिक मामलों की जानकार दिव्या मल्होत्रा का कहना है कि भले ही इसे एक बार का शक्ति प्रदर्शन माना जाए, लेकिन सच्चाई यह है कि चीन अब अपने परमाणु हथियारों को छिपाने के बजाय दुनिया के सामने खुले तौर पर पेश कर रहा है। सितंबर 2024 में प्रशांत महासागर में आईसीबीएम (ICBM) परीक्षण के बाद यह घटना दिखाती है कि चीन तेजी से अपनी समुद्री परमाणु क्षमता को अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के बराबरी पर लाने की कोशिश कर रहा है।
पड़ोसियों के लिए बढ़ी चिंताएं
China Nuclear Missile न केवल वैश्विक स्तर पर बल्कि भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे पड़ोसी देशों के लिए भी एक बड़ा संकेत है। दक्षिण प्रशांत क्षेत्र, जिसे परमाणु-मुक्त माना जाता रहा है, वहां इस तरह की मिसाइलों की उपस्थिति ने क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब रक्षा विश्लेषक इसे चीन की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं, जहां वह समुद्र में लगातार परमाणु गश्त करने की क्षमता हासिल कर रहा है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो इस समय जब पश्चिमी देशों का ध्यान ईरान पर टिका हुआ है, तब चीन अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है। यह घटनाक्रम यह साफ बताता है कि आने वाले समय में प्रशांत महासागर का इलाका वैश्विक राजनीति और सुरक्षा का एक नया केंद्र बनने जा रहा है, जिस पर सभी देशों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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