गुजरात के मुंद्रा स्थित अडानी पोर्ट्स पर भारतीय ध्वज वाला कच्चा तेल टैंकर ‘Jag Laadki’ पहुंच गया है। यह टैंकर यूएई के फुजैराह बंदरगाह से करीब 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आया है। इससे पहले LPG टैंकर ‘शिवालिक’ भी होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर 46,000 टन गैस के साथ मुंद्रा पहुंच चुका है। वहीं, एक अन्य LPG जहाज़ ‘नंदा देवी’ वडिनार पोर्ट पर डॉक किया गया है। इन खेपों के पहुंचने से देश की ऊर्जा आपूर्ति को मजबूती मिलने की उम्मीद है। ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल सप्लाई पर असर साफ दिख रहा है। ऐसे समय में भारत के लिए यह राहत भरी खबर है।
Jag Laadki टैंकर की अहमियत
Jag Laadki टैंकर करीब 80,886 टन कच्चा तेल लेकर मुंद्रा पोर्ट पहुंचा। यह जहाज ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी का है और हाल के दिनों में भारत आने वाला तीसरा बड़ा टैंकर है।
इस समय जब होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही प्रभावित है, Jag Laadki का सुरक्षित पहुंचना काफी मायने रखता है। यह टैंकर संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा पोर्ट से रवाना हुआ था।

मुश्किल हालात में भी सफर जारी
दिलचस्प बात यह है कि Jag Laadki उसी दिन रवाना हुआ था, जब फुजैरा के तेल टर्मिनल पर हमला हुआ था। इसके बावजूद जहाज ने अपना सफर पूरा किया और भारत तक तेल पहुंचाया।
274 मीटर लंबा Jag Laadki एक मजबूत समुद्री टैंकर है, जिसे 2010 में बनाया गया था। यह भारत और पश्चिम एशिया के देशों के बीच तेल आपूर्ति का अहम हिस्सा है।
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होर्मुज की खाड़ी और सप्लाई संकट
होर्मुज की खाड़ी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल रूट्स में से एक है। यहां से करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई होती है। मौजूदा तनाव के कारण रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल सप्लाई प्रभावित हुई है।
ऐसे में Jag Laadki जैसे टैंकर भारत के लिए जरूरी बन जाते हैं, क्योंकि देश अपनी 90 प्रतिशत तेल जरूरतें आयात करता है।
भारत की रणनीति में बदलाव
ईरान युद्ध के बाद भारत ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई गई है और गैस के लिए नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं।हाल ही में Jag Laadki के अलावा शिवालिक और नंदा देवी जैसे टैंकर भी भारत पहुंचे हैं, जो अलग-अलग देशों से तेल और गैस लेकर आए हैं। इससे सप्लाई चेन को संतुलित रखने में मदद मिल रही है।
मौजूदा हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन Jag Laadki जैसे टैंकर भारत के लिए राहत लेकर आ रहे हैं। यह दिखाता है कि मुश्किल समय में भी सप्लाई बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। आने वाले समय में ऐसी और पहलें भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेंगी।
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