उत्तर प्रदेश में सुरक्षा बलों के ठिकानों और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की गोपनीय जानकारी विदेश भेजने वाले एक खतरनाक गिरोह का गाजियाबाद पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन की कमान संभाल रहे एडीसीपी राजकरण नैय्यर ने बताया कि पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए मुख्य सरगना सुहेल मलिक उर्फ रोमियो सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुका था, जो रेलवे स्टेशनों, सुरक्षा बलों के कैंपों और अन्य संवेदनशील ठिकानों के वीडियो व सटीक लोकेशन विदेशी हैंडलर्स को मुहैया करा रहा था।
एडीसीपी राजकरण नैय्यर का खुलासा: जब्त मोबाइल फोन उगल रहे गहरे राज
एडीसीपी राजकरण नैय्यर के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 8 हाई-टेक मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन फोन की शुरुआती जांच में पुलिस को कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। मोबाइल में रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा कैंपों के प्रतिबंधित क्षेत्रों के वीडियो मिले हैं। इसके अलावा, विदेशी नंबरों के साथ की गई व्हाट्सएप और टेलीग्राम चैट से यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी लगातार सीमा पार संपर्क में थे। एडीसीपी नैय्यर ने बताया कि पकड़े गए साक्ष्यों की गंभीरता से जांच की जा रही है और फॉरेंसिक टीम डेटा रिकवर करने में जुटी है।
मोटी रकम के बदले देश की सुरक्षा से खिलवाड़: ‘रोमियो’ का नेटवर्क औरैया से बिजनौर तक फैला
पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि आरोपी योजनाबद्ध तरीके से संवेदनशील डेटा विदेशी संपर्कों को भेजते थे, जिसके बदले उन्हें हवाला या अन्य डिजिटल माध्यमों से मोटी रकम भेजी जाती थी। मुख्य आरोपी सुहेल मलिक उर्फ रोमियो (बिजनौर) इस गिरोह का मास्टरमाइंड है, जिसने संभल, कौशांबी, औरैया, बदायूं और शाहजहांपुर के युवाओं को इस अवैध नेटवर्क में शामिल किया था। एडीसीपी नैय्यर ने स्पष्ट किया कि हालांकि अभी तक किसी आतंकी संगठन से सीधे जुड़ाव की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से संवेदनशील डेटा भेजा गया है, उससे किसी बड़ी साजिश की बू आ रही है।
कानूनी शिकंजा: कोर्ट में पेशी और टेरर एंगल की तलाश
पुलिस ने सभी 6 आरोपियों—सुहेल मलिक, साने इरम, प्रवीन, राज वाल्मिकी, शिवा वाल्मिकी और रितिक गंगवार के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। एडीसीपी राजकरण नैय्यर ने बताया कि आरोपियों को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस खेल के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है और विदेशों में यह जानकारी किस मकसद से भेजी जा रही थी। यूपी पुलिस अब उन बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की भी जांच कर रही है, जिनके जरिए आरोपियों को फंड मुहैया कराया गया था। – डॉ मंगलेश्वर त्रिपाठी