नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने आज रेल मंत्रालय की दो महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। लगभग 4,474 करोड़ रुपये की कुल अनुमानित लागत वाली ये परियोजनाएं पश्चिम बंगाल और झारखंड के रेल नेटवर्क की तस्वीर बदल देंगी। प्रधानमंत्री के ‘नए भारत’ के दृष्टिकोण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के अनुरूप, इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार और माल ढुलाई की क्षमता को कई गुना बढ़ाना है।
ये परियोजनाएं मुख्य रूप से ‘पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के तहत तैयार की गई हैं, जो लॉजिस्टिक दक्षता और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी पर केंद्रित हैं।
स्वीकृत रेल परियोजनाओं का विवरण
मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई दो प्रमुख रेल लाइनें निम्नलिखित हैं:
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सैंथिया-पाकुड़ चौथी लाइन: यह खंड झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच रेल संपर्क को और अधिक मजबूत करेगा।
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संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन: हावड़ा-मुंबई मुख्य मार्ग के इस व्यस्त खंड पर चौथी लाइन बिछने से ट्रेनों की लेटलतीफी कम होगी और परिचालन दक्षता बढ़ेगी।
इन दोनों परियोजनाओं के माध्यम से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 192 किलोमीटर की अतिरिक्त लाइन जोड़ी जाएगी। इससे पश्चिम बंगाल और झारखंड के 5 जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।
147 लाख की आबादी और 5,652 गांवों को मिलेगा लाभ
इन परियोजनाओं का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव बेहद व्यापक होने वाला है। आंकड़ों के अनुसार:
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कनेक्टिविटी: ये नई लाइनें लगभग 5,652 गांवों को बेहतर रेल संपर्क प्रदान करेंगी।
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जनसंख्या: इस विकास कार्य से लगभग 147 लाख की आबादी सीधे तौर पर लाभान्वित होगी।
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पर्यटन को बढ़ावा: रेल नेटवर्क में सुधार से बोलपुर-शांतिनिकेतन, तारापीठ (शक्तिपीठ), नंदिकेश्वरी मंदिर, भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य और रामेश्वर कुंड जैसे प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक पहुँचना आसान हो जाएगा।
माल ढुलाई में क्रांति और राजस्व में वृद्धि
कोयला, पत्थर, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसे उद्योगों के लिए ये रेल मार्ग ‘लाइफलाइन’ माने जाते हैं। नई लाइनों के निर्माण के बाद:
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अतिरिक्त क्षमता: प्रति वर्ष 31 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी।
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लॉजिस्टिक लागत में कमी: निर्बाध आवागमन से वस्तुओं के परिवहन की लागत घटेगी, जिसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा।
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रोजगार: निर्माण और परिचालन के दौरान क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।
पर्यावरण सुरक्षा: 1 करोड़ पौधों के बराबर कार्बन बचत
भारतीय रेलवे एक ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन माध्यम है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से पर्यावरण को होने वाले लाभ चौंकाने वाले हैं:
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तेल की बचत: प्रति वर्ष लगभग 6 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी।
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कार्बन उत्सर्जन: लगभग 28 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा।
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वृक्षारोपण का प्रभाव: यह पर्यावरणीय लाभ लगभग 1 करोड़ पौधे लगाने के बराबर है।
कनेक्टिविटी से समृद्धि का मार्ग
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इन रेल परियोजनाओं को मंजूरी मिलना पूर्वी भारत के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल लोगों के आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि औद्योगिक गलियारों को शक्ति देकर देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगा। गति शक्ति मास्टर प्लान के तहत एकीकृत योजना यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में ये रेल लाइनें विकास का नया इंजन साबित हों।