उत्तर प्रदेश अब सिर्फ विकास योजनाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के कारण भी चर्चा में है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाए गए हैं, उससे प्रदेश की पहचान धीरे-धीरे हरित प्रदेश के रूप में मजबूत हो रही है। सरकार का कहना है कि विकास और हरियाली साथ-साथ चलें, यही सोच आगे बढ़ाई जा रही है।
9 वर्षों में बड़ा पौधरोपण अभियान
2017 में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता में रखा। पर्यावरण दिवस हो या वर्षाकाल का समय, प्रदेश में लगातार पौधरोपण अभियान चलाए गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 9 वर्षों में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।
इसका असर वनाच्छादन पर भी पड़ा है। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट-2023 के अनुसार उत्तर प्रदेश का वन क्षेत्र 559.19 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। सरकार का मानना है कि अगर यही गति बनी रही तो हरित प्रदेश का लक्ष्य और मजबूत होगा।
एक दिन में रिकॉर्ड पौधरोपण
पिछले वर्ष 9 जुलाई को पूरे प्रदेश में एक ही दिन में 37.21 करोड़ पौधे लगाए गए। वहीं वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित वृहद पौधरोपण कार्यक्रम में एक घंटे में 2,51,446 पौधे रोपे गए। इस उपलब्धि पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के जज ऋषिनाथ ने महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाणपत्र सौंपा।
करीब 350 बीघा में विकसित इस शहरी वन ने हरित प्रदेश की सोच को जमीनी रूप दिया है। इससे पहले 2018 में चीन के हेनान प्रांत में 1,53,981 पौधे लगाकर रिकॉर्ड बनाया गया था। अब वाराणसी की इस पहल ने नया मानक तय किया है।
बच्चों के नाम ‘ग्रीन गोल्ड’
सरकार ने पौधरोपण को सिर्फ अभियान तक सीमित नहीं रखा। 1 से 7 जुलाई 2025 के बीच जन्मे 18,348 बच्चों को ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट और उनके अभिभावकों को पौधे भी दिए गए। इसका मकसद साफ है—पर्यावरण संरक्षण को परिवार और समाज से जोड़ना। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी सराहना की थी। ऐसे प्रयासों से हरित प्रदेश की दिशा में सामाजिक भागीदारी बढ़ रही है।

2026 के लिए नई तैयारी
वन एवं पर्यावरण विभाग ने वर्षाकाल 2026 के लिए 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य तय किया है। बजट में सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये, पौधशाला प्रबंधन योजना के लिए 220 करोड़ रुपये और राज्य प्रतिकारात्मक वन रोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक प्रदेश का हरित आवरण 15 प्रतिशत तक ले जाना है। यह तभी संभव होगा जब हरित प्रदेश का अभियान जनांदोलन बने।

गांवों में ग्रीन चौपाल
पर्यावरण संरक्षण को गांवों तक पहुंचाने के लिए ग्रीन चौपाल का गठन किया गया है। अब तक 15,000 से अधिक ग्रामसभाओं में चौपाल का आयोजन हो चुका है। ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में होने वाली इन बैठकों में स्थानीय लोग, अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल होते हैं।
हर महीने बैठक कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि लगाए गए पौधों की देखभाल हो। क्योंकि सिर्फ पौधे लगाना ही काफी नहीं, उन्हें बड़ा करना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ हरित प्रदेश का सपना आगे बढ़ रहा है।
उत्तर प्रदेश में बीते वर्षों में जिस स्तर पर पौधरोपण हुआ है, उसने पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाई है। आंकड़े बताते हैं कि वन क्षेत्र में वृद्धि हुई है और आने वाले वर्षों के लिए भी योजनाएं तैयार हैं। अगर सरकारी प्रयासों के साथ जनता की भागीदारी लगातार बनी रही, तो हरित प्रदेश का लक्ष्य केवल नारा नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई बन सकता है।
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