नवी मुंबई में ‘हिंद-दी-चादर’ समागम: पीएम मोदी ने गुरु तेग बहादुर को दी श्रद्धांजलि, बोले- सामाजिक एकता का प्रतीक है यह आयोजन

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नवी मुंबई। महाराष्ट्र की उपनगरी नवी मुंबई में नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी पर्व के उपलक्ष्य में ‘हिंद-दी-चादर’ समागम का ऐतिहासिक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लाखों की संख्या में संगत और विभिन्न समुदायों के लोग एकत्र हुए, जो सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का एक बड़ा संदेश दे रहे थे। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने इस समागम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सभी धर्मों की समानता और आपसी भाईचारे को समर्पित है।

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत के दौरान मंगल प्रभात लोढ़ा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की जमकर सराहना की। लोढ़ा ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के विचारों से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस ‘सर्व धर्म समभाव’ कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की थी। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुटना इस बात का प्रमाण है कि देश की जनता एकजुट है और गुरुओं के दिखाए मार्ग पर चलने के लिए संकल्पित है।

पीएम मोदी ने वीडियो संदेश के जरिए गुरु साहिब को किया नमन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इस पावन अवसर पर वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने गुरु तेग बहादुर साहिब के बलिदान को याद करते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक और पवित्र कार्यक्रम का हिस्सा बनना उनके लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का इतिहास हमेशा से वीरता, तालमेल और अटूट सहयोग का रहा है। उन्होंने महाराष्ट्र की धरती को नमन करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से पूरी दुनिया भारत की उस महान विरासत की साक्षी बन रही है, जिसमें त्याग और बलिदान सर्वोपरि है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जब हमारे गुरुओं ने त्याग की पराकाष्ठा को छुआ, तब समाज की एकता ने ही उस संघर्ष को शक्ति दी। हर वर्ग और हर समाज के व्यक्ति ने गुरुओं के जीवन से प्रेरणा ली है। उन्होंने ‘गुरु नानक नाम लेवा संगत’ जैसे रीति-रिवाजों का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट के समय में सच्चाई और अपनी संस्कृति पर अडिग रहने की सीख हमें इन्हीं परंपराओं से मिली है। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि आज जब देश को सामाजिक एकजुटता की सर्वाधिक आवश्यकता है, तब संगत का यह विशाल समागम हमें भरोसा दिलाता है कि संतों और गुरुओं का आशीर्वाद भारत के साथ है।

नागपुर से नवी मुंबई तक: वीरता की गाथा का सफर

महाराष्ट्र सरकार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने इसके सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर साहिब की वीरता और उनके महान इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने का यह अभियान पिछले वर्ष नागपुर की पवित्र भूमि से शुरू हुआ था। इसके बाद तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ की ऐतिहासिक धरती पर इस भावना को और अधिक विस्तार मिला। अब यह सफर नवी मुंबई के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुका है। पीएम मोदी ने कहा कि यह संदेश केवल इन तीन शहरों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि गुरु साहिब की बहादुरी की कहानियां महाराष्ट्र के हजारों गांवों और छोटी बस्तियों तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने इस व्यापक आयोजन के लिए महाराष्ट्र प्रशासन और मुख्यमंत्री को विशेष बधाई दी।

धार्मिक स्वतंत्रता के रक्षक थे गुरु तेग बहादुर

सिख इतिहास में नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर साहिब का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। उन्हें मुगल काल के दौरान होने वाले अत्याचारों और जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाने के लिए ‘हिंद-दी-चादर’ की उपाधि दी गई थी। गुरु साहिब ने धार्मिक स्वतंत्रता और कश्मीरी पंडितों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, दिल्ली के चांदनी चौक में मुगल शासकों द्वारा उनका सिर कलम कर दिया गया था, जहां आज भव्य गुरुद्वारा शीशगंज साहिब सुशोभित है। उनका बलिदान आज भी करोड़ों लोगों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने और मानवीय मूल्यों की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। नवी मुंबई का यह समागम उसी महान शहादत को समर्पित रहा, जिसमें समाज के हर वर्ग ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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