दिल्ली की राजनीति में पिछले दो वर्षों से चल रहे सबसे बड़े कानूनी संग्राम में आज आम आदमी पार्टी (आप) की जबरदस्त जीत हुई है। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कथित ‘शराब नीति घोटाले’ से जुड़े सीबीआई के मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने न केवल इन दोनों दिग्गज नेताओं को राहत दी, बल्कि सीबीआई द्वारा पेश किए गए आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से भी साफ इनकार कर दिया। यह फैसला आम आदमी पार्टी के लिए संजीवनी की तरह है, जो लंबे समय से इस मामले को ‘राजनीतिक साजिश’ करार दे रही थी। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने इस मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के साथ-साथ सभी 21 अन्य आरोपियों को भी बरी करने का आदेश जारी किया।
सीबीआई की जांच में भारी चूक: कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और संघीय एजेंसी को कड़ी फटकार लगाई। न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि अरविंद केजरीवाल के खिलाफ एजेंसी के पास कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं थे। निचली अदालत ने कहा, “किसी भी विश्वसनीय सबूत के अभाव में केजरीवाल के खिलाफ लगाए गए आरोप टिक नहीं सकते। पूर्व मुख्यमंत्री को बिना किसी पुख्ता सबूत के इस मामले में फंसाया गया है, जो कानून के शासन (Rule of Law) के पूरी तरह प्रतिकूल है।” कोर्ट की यह टिप्पणी सीबीआई की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
सिसोदिया के खिलाफ नहीं मिला कोई सबूत
मनीष सिसोदिया के संदर्भ में अदालत ने और भी कड़ी रुख अपनाया। न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई भी साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जो आबकारी नीति के निर्माण या कार्यान्वयन में उनकी संलिप्तता को साबित करता हो। निचली अदालत ने गौर किया कि मनीष सिसोदिया से किसी भी तरह की कोई बरामदगी नहीं हुई है और न ही जांच एजेंसी यह साबित कर पाई है कि उन्हें किसी भी स्तर पर कोई अनुचित लाभ मिला। न्यायाधीश ने सीबीआई के आरोपपत्र में कई ‘भ्रामक कथनों’ की ओर इशारा करते हुए कहा कि विस्तृत चार्जशीट में कई ऐसी कमियां हैं जिनकी पुष्टि न तो गवाहों से होती है और न ही पेश किए गए सबूतों से।
साजिश की थ्योरी पूरी तरह विफल
न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में ‘साजिश की थ्योरी’ की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि सीबीआई के आरोपपत्र में आंतरिक विरोधाभास हैं। उन्होंने कहा, “ये विरोधाभास उस आधार पर ही प्रहार करते हैं जिस पर पूरी साजिश की थ्योरी टिकी हुई थी।” निचली अदालत के मुताबिक, सीबीआई यह बताने में विफल रही कि कथित घोटाला किस तरह हुआ और इसमें अरविंद केजरीवाल की क्या भूमिका थी। कोर्ट ने माना कि बिना किसी आधार के नेताओं को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में उलझाए रखना न्यायोचित नहीं है।
आम आदमी पार्टी में जश्न का माहौल
निचली अदालत के इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के मुख्यालय और दिल्ली की सड़कों पर समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा। पार्टी के नेताओं ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया है। अरविंद केजरीवाल ने हमेशा से इस मामले को केंद्र सरकार की बदले की राजनीति बताया था, और आज अदालत के फैसले ने उनके उस पक्ष को मजबूती प्रदान की है। हालांकि, मामले में विस्तृत लिखित आदेश का अभी इंतजार है, लेकिन इस फैसले ने दिल्ली के सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सीबीआई इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाती है या नहीं।