नई दिल्ली: नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की एक टेक्स्टबुक को लेकर देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की किताब से जुड़ा है, जिसमें ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ (Corruption in Judiciary) को लेकर एक विशेष सेक्शन शामिल किया गया था। इस मुद्दे पर Supreme Court ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए इसे न्यायपालिका की छवि खराब करने की एक ‘गहरी साजिश’ करार दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
NCERT ने हाल ही में सत्र 2026-27 के लिए नई किताबें जारी की हैं। इनमें से कक्षा 8 की किताब ‘Exploring Society: India and Beyond’ (Vol II) के चौथे अध्याय, जिसका शीर्षक ‘The Role of Judiciary in our Society’ है, में न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया गया था।
इस चैप्टर में ज्यूडिशियरी के कामकाज, मुकदमों के बोझ और जजों की कमी के साथ-साथ ‘भ्रष्टाचार’ का भी उल्लेख किया गया था। किताब में लिखा गया था कि न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर लोग भ्रष्टाचार का अनुभव करते हैं, जिससे न्याय तक पहुँच (Access to Justice) प्रभावित होती है।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: “हेड्स मस्ट रोल”
इस मामले का संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) Surya Kant की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि छोटी उम्र के बच्चों के मन में न्यायपालिका के प्रति ऐसा नकारात्मक विचार डालना संस्थान की गरिमा को ठेस पहुँचाना है।
CJI ने सुनवाई के दौरान कहा:
“अगर आप पूरे शिक्षक समुदाय और छात्रों को यह सिखाएंगे कि न्यायपालिका भ्रष्ट है, तो समाज में क्या संदेश जाएगा? यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सम्मान को कम करने के लिए एक सोची-समझी साजिश लगती है।”
अदालत ने यह भी साफ किया कि वह इस मामले में जवाबदेही तय करेगी और कहा कि “Heads must roll” (यानी जिम्मेदार लोगों पर गाज गिरेगी)। कोर्ट ने NCERT के निदेशक और शिक्षा मंत्रालय के सचिव को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी किया है।
NCERT की सफाई और माफ़ी
विवाद बढ़ने और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद NCERT ने तुरंत अपनी गलती मानी है। काउंसिल ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा:
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Unintentional Error: किताब में इस तरह की सामग्री का शामिल होना “पूरी तरह से अनजाने में हुई गलती” है।
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Apology: NCERT न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करती है और इस त्रुटि के लिए क्षमा मांगती है।
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Withdrawal: विवादित किताब के वितरण पर तुरंत रोक लगा दी गई है और मार्केट से प्रतियों को वापस मंगाया जा रहा है।
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Rewriting: इस चैप्टर को अब कानूनी विशेषज्ञों की सलाह से दोबारा लिखा जाएगा।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने कोर्ट में बिना शर्त माफ़ी मांगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस अध्याय को तैयार करने वाले और इसे मंजूरी देने वाले विशेषज्ञों को भविष्य में शिक्षा मंत्रालय के किसी भी काम से स्थायी रूप से बाहर (Ban) कर दिया जाएगा। सरकार ने बताया कि छपी हुई 2.25 लाख प्रतियों में से अधिकांश को वितरण से पहले ही रोक लिया गया है।
उत्तर प्रदेश के स्कूलों पर असर
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हजारों स्कूलों में NCERT का सिलेबस लागू है। राज्य के शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्कूल में इस विवादित किताब से पढ़ाई न हो। UP Board और CBSE से संबद्ध स्कूलों के प्राचार्यों को स्टॉक चेक करने और विवादित प्रतियों को सील करने के आदेश दिए गए हैं।