रामपुर के पशुपालकों और गौवंश संरक्षण की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। अब जिले की गौशालाओं में गायों को मिलने वाली सुविधाओं और वहां की साफ-सफाई में कोई भी हीला-हवाली नहीं चलेगी। जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने विकास भवन में एक हाईटेक केंद्रीकृत कंट्रोल रूम का उद्घाटन कर व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। अक्सर यह शिकायतें आती थीं कि दूर-दराज के इलाकों में स्थित गौ-आश्रय स्थलों पर कर्मचारी समय से नहीं पहुँचते या फिर गौवंश के चारे-पानी में कोताही बरती जाती है। इन्हीं समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए रामपुर की गौशालाओं की ऑनलाइन निगरानी शुरू की गई है। अब डीएम और पशुपालन विभाग के आला अधिकारी एक क्लिक पर किसी भी गौशाला का हाल अपनी स्क्रीन पर देख सकेंगे।

कंट्रोल रूम की शुरुआत और जिलाधिकारी के सख्त निर्देश
विकास भवन में बनाए गए इस नए कंट्रोल रूम का उद्घाटन जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने फीता काटकर किया। इस दौरान उन्होंने खुद लाइव फीड के जरिए अलग-अलग गौ-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को देखा। डीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल सीसीटीवी कैमरे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन कैमरों के साथ ऑडियो माइक्रोफोन की व्यवस्था भी जल्द से जल्द की जाए। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कंट्रोल रूम में बैठा अधिकारी वहीं से गौशाला के सेवादारों को निर्देश दे सकेगा। अगर कोई कर्मचारी ड्यूटी से गायब है या चारे की व्यवस्था ठीक नहीं है, तो उसे सीधे संवाद के जरिए टोका जा सकेगा। जिलाधिकारी का मानना है कि इससे किसी भी आकस्मिक स्थिति में तुरंत एक्शन लिया जा सकेगा और गौवंश के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं होगा।

तकनीक से सुधरेगी गौवंश की स्थिति
रामपुर जिले में स्थाई एवं अस्थाई गौ-आश्रय स्थल काफी संख्या में संचालित हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अश्वनी कुमार के मुताबिक, वर्तमान में 12 प्रमुख केंद्रों पर लगभग 3026 गौवंश संरक्षित हैं। इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की देखभाल करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे अब तकनीक के जरिए आसान बनाया जा रहा है। इन सभी गौ-आश्रय स्थलों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। इसकी सतत मॉनीटरिंग के लिए बाकायदा एक रोस्टर तैयार किया गया है। पशुधन प्रसार अधिकारियों की ड्यूटी शिफ्ट के हिसाब से लगाई गई है ताकि 24 घंटे इन केंद्रों पर नजर रखी जा सके। साथ ही, व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो सीधे डीएम को रिपोर्ट करेंगे।

जमीनी हकीकत पर प्रशासन की सीधी नजर
प्रशासन का यह कदम उन लोगों के लिए भी एक कड़ा संदेश है जो गौशालाओं के नाम पर मिलने वाले फंड का सही इस्तेमाल नहीं करते। पशुधन प्रसार अधिकारियों की ड्यूटी अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें स्क्रीन पर दिख रही हर गतिविधि का जवाब देना होगा। गौवंश के संरक्षण, पोषण और स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। डीएम ने अधिकारियों को दो टूक कहा है कि नियमित निरीक्षण और डिजिटल निगरानी से व्यवस्थाओं को सुदृढ़ रखा जाए। अगर किसी भी गौशाला में पशु बीमार मिलता है या वहां गंदगी पाई जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी सीधे संबंधित क्षेत्र के अधिकारी की होगी।
पशुपालन विभाग का नया एक्शन प्लान
रामपुर में गौशालाओं का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए विभाग अब और भी सक्रिय नजर आ रहा है। सीसीटीवी की लाइव फीड को जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल से भी जोड़ने की योजना है, जिससे चलते-फिरते भी व्यवस्था देखी जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की इस पहल से आवारा पशुओं की समस्या से निपटने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि अब गौशालाओं की क्षमता और वहां की सुविधाओं का वास्तविक डाटा हर समय उपलब्ध रहेगा।
गौवंश संरक्षण एवं पोषण की इस पूरी प्रक्रिया में अब पारदर्शिता आएगी। चारे की खरीद से लेकर टीकाकरण तक की हर प्रक्रिया को रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है। इससे पहले कई बार शिकायतें आती थीं कि कागजों पर तो सब ठीक है, लेकिन धरातल पर पशुओं की हालत दयनीय है। अब ऑनलाइन निगरानी सिस्टम से इन शिकायतों का दौर खत्म होने की उम्मीद है।
रामपुर के गौ-आश्रय स्थलों का डाटा एक नजर में
| विवरण | आंकड़े |
| कुल सक्रिय गौ-आश्रय स्थल | 12 (स्थाई व अस्थाई) |
| संरक्षित गौवंश की संख्या | 3026 |
| निगरानी का तरीका | ऑनलाइन सीसीटीवी कंट्रोल रूम |
| जिम्मेदारी | पशुधन प्रसार अधिकारी एवं नोडल अधिकारी |
रामपुर के विकास भवन में बना यह कंट्रोल रूम अब जिले की सभी सरकारी गौशालाओं की धड़कन बन चुका है। जिलाधिकारी की इस पहल की हर तरफ सराहना हो रही है, क्योंकि यह न केवल तकनीक का सही इस्तेमाल है, बल्कि बेजुबान पशुओं के प्रति मानवीय संवेदनाओं का भी एक बड़ा उदाहरण है। आने वाले समय में जिले की अन्य छोटी गौशालाओं को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है, ताकि रामपुर प्रदेश में गौ-सेवा के मामले में एक मॉडल बनकर उभर सके।
प्रशासन की इस मुस्तैदी से अब कर्मचारियों में भी हड़कंप है। जो लोग केवल हाजिरी लगाकर गायब हो जाते थे, उन्हें अब अपनी ड्यूटी के प्रति गंभीर होना पड़ेगा। कैमरों की जद में आने के बाद अब न तो कोई गौवंश भूखा रहेगा और न ही किसी भी तरह की अव्यवस्था को छिपाया जा सकेगा।