हापुड़ जिले के कुचेसर चौपला में महिलाओं को खेलों में प्रोत्साहन देने और ग्रामीण क्षेत्रों की छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने के उद्देश्य से दो दिवसीय विशाल दंगल का आयोजन किया गया, जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींचा। संत महात्मा गंगादास महाराज की स्मृति में बीते 50 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा यह दंगल इस बार और भी खास रहा क्योंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और ग्रामीण स्तर की महिला और पुरुष पहलवानों ने दमखम दिखाया। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब समेत कई राज्यों से पहुंचे पहलवानों ने अखाड़े में अपने दांव-पेंच का शानदार प्रदर्शन किया और दर्शकों को रोमांचित किया। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि महिला पहलवानों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखने को मिली, जिससे ग्रामीण अंचल में खेलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उत्साह का स्पष्ट संदेश मिला। प्रतियोगिता के अंत में विजयी महिला और पुरुष पहलवानों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया,
जिससे उनका हौसला और बढ़ा। दंगल समिति के आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन का मकसद न केवल खेलों को बढ़ावा देना है, बल्कि समाज में यह संदेश भी देना है कि खेल के मैदान में लड़का और लड़की में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। यह आयोजन ग्रामीण युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रखकर खेल और अनुशासन की राह पर प्रेरित करने का एक सफल प्रयास भी माना जा रहा है। कुचेसर चौपला का यह ऐतिहासिक दंगल अब केवल एक कुश्ती प्रतियोगिता नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण संस्कृति और परंपरा का प्रतीक बन चुका है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी समाज को जोड़ने और महिलाओं को सशक्त बनाने का मंच प्रदान कर रहा है।
अखाड़े में गूंजते जयकारों, ढोल-नगाड़ों और जोशीले नारों के बीच जब महिला पहलवानों ने पुरुष प्रतिद्वंद्वियों के साथ बराबरी का मुकाबला किया तो वहां मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। इस तरह का आयोजन जहां खेलों में नई ऊर्जा का संचार करता है, वहीं यह साबित करता है कि ग्रामीण भारत की मिट्टी में आज भी ऐसी अनगिनत प्रतिभाएं छुपी हैं जिन्हें अवसर मिले तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकती हैं।