शास्त्रीय संगीत के वरिष्ठ कलाकार पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन, संगीत जगत में शोक की लहर

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भारतीय शास्त्रीय संगीत के स्तंभ और प्रख्यात गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन हो गया है। 91 वर्षीय पंडित जी ने सोमवार सुबह लगभग सवा चार बजे मिर्जापुर की गंगा दर्शन कॉलोनी स्थित अपनी बेटी के निवास स्थान पर अंतिम सांस ली। बीते सात महीनों से वह अस्वस्थ चल रहे थे और हाल ही में 17 दिनों तक वाराणसी स्थित बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती रहे थे। उनके निधन की खबर से पूरे संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

पंडित छन्नूलाल मिश्र का नाम भारतीय शास्त्रीय संगीत, विशेषकर ठुमरी, दादरा, कजरी और भजन गायन में एक ऊँचे शिखर पर रहा है। बनारस घराने के इस दिग्गज कलाकार ने अपने स्वर से न केवल भारतीय संगीत जगत बल्कि पूरी दुनिया में भारत की सांस्कृतिक विरासत को स्थापित किया। पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजे गए पंडित जी संगीत साधना की जीवित मिसाल रहे।

उनकी बेटी नम्रता मिश्र ने बताया कि पंडित जी का स्वास्थ्य लंबे समय से कमजोर था और परिवार ने उन्हें पूरी सेवा और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई, लेकिन आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। परिजनों ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा।

पंडित जी के निधन से संगीत जगत के साथ-साथ उनके शिष्यों और प्रशंसकों में गहरा शोक है। कलाकारों और संगीत प्रेमियों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक पूरे युग का अंत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन पर व्यक्त किया गहरा शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद्मविभूषण से सम्मानित शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका जाना भारतीय संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने बताया कि पंडित जी ने बनारस घराने की परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया और काशी की संस्कृति, उत्सवों और लोकगायन को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें कई अवसरों पर पंडित जी से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और 2014 के चुनाव में वे उनके प्रस्तावक भी बने थे। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उनका आवास पर आना आज भी अविस्मरणीय है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही पंडित मिश्र जी सशरीर अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संगीत और काशी के प्रति समर्पण सदा जीवंत रहेगा। उन्होंने उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए बाबा विश्वनाथ से उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।

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