Nepal Election 2026: पड़ोसी देश नेपाल में आगामी 5 मार्च 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों को लेकर सुरक्षा तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी क्रम में भारत और नेपाल के सुरक्षा बलों ने आपसी सहमति से भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सभी सीमा चौकियों को 72 घंटे के लिए बंद रखने का निर्णय लिया है। यह कदम चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से उठाया गया है।
यह फैसला शुक्रवार को नेपाल के मोरंग जिले के बीरतनगर में आयोजित 16वीं उप महानिरीक्षक (DIG) स्तरीय समन्वय बैठक के दौरान लिया गया। बैठक में नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (APF) और भारत के सशस्त्र सीमा बल (SSB) के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

चुनाव से पहले कड़ा सीमा नियंत्रण
नेपाल एपीएफ के प्रवक्ता डीआईजी बिष्णु प्रसाद भट्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि नेपाल की ओर से चुनाव से दो दिन पहले सीमा चौकियां बंद करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे भारतीय पक्ष ने स्वीकार कर लिया। समझौते के तहत चुनाव दिवस सहित कुल तीन दिन यानी 72 घंटे तक सीमा चौकियां बंद रहेंगी।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती होती है, ऐसे में सीमा पार से अवांछित तत्वों की आवाजाही को रोकना बेहद जरूरी हो जाता है। यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच पहले से चली आ रही एक स्थापित प्रथा का हिस्सा है।
अवैध गतिविधियों पर चर्चा
बैठक में सीमा सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें सीमा पार अपराधों पर नियंत्रण, तीसरे देशों के नागरिकों की अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा, हथियार और गोला-बारूद की तस्करी, साथ ही नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार जैसे विषय शामिल रहे।
भारत की ओर से एक बार फिर इस चिंता को दोहराया गया कि भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाकर कश्मीरी और पाकिस्तानी आतंकवादी घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। इस पर दोनों पक्षों ने संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और खुफिया जानकारी साझा करने पर सहमति जताई।
सहयोग और संयुक्त गतिविधियों पर जोर
बैठक में केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आपसी सहयोग बढ़ाने से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसमें सीमा स्तंभों की सुरक्षा, यात्रियों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना, संयुक्त गश्त, आपदा प्रबंधन के लिए संयुक्त बचाव अभ्यास और दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच संयुक्त खेल गतिविधियों के आयोजन जैसे प्रस्ताव शामिल थे।
इसके अलावा, दोनों देशों ने संवेदनशील सीमा बिंदुओं की पहचान, संभावित जोखिमों का आकलन, शरणार्थियों और प्रवासियों की गतिविधियों पर नजर रखने और विभिन्न स्तरों पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने पर सहमति जताई।