बरेली बवाल का तीसरा मास्टरमाइंड डॉक्टर नफीस गिरफ्तार, अब तक 81 उपद्रवी पुलिस की पकड़ में

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बरेली में 26 सितंबर को हुए बड़े बवाल के तीसरे मास्टरमाइंड डॉक्टर नफीस को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। नफीस, जो इंडियन मुस्लिम काउंसिल (आईएमसी) का राष्ट्रीय प्रवक्ता है, पर आरोप है कि उसने न केवल पोस्टर विवाद को भड़काने का प्रयास किया बल्कि पुलिस के साथ बदसलूकी भी की। पुलिस ने नफीस के बेटे फरहान को भी गिरफ्तार किया है, जिस पर आईएमसी के फेसबुक पेज का संचालन कर भीड़ को भड़काने और मौलाना तौकीर की भड़काऊ स्पीच के जरिए अफवाह फैलाने का आरोप है। इस कार्रवाई के साथ ही अब तक पुलिस कुल 81 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

पुलिस के मुताबिक, 26 सितंबर को आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर के आह्वान पर इस्लामिया ग्राउंड में लाखों लोग इकट्ठा हुए थे। पुलिस ने पहले ही प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि मौलाना के आह्वान पर पहले भी उपद्रव हो चुका था। बावजूद इसके, नमाज के समय में बदलाव कर और सोशल मीडिया के जरिए संदेश फैलाकर बड़ी भीड़ जुटाई गई। इसके बाद इस्लामिया ग्राउंड और आसपास के इलाकों में धक्का-मुक्की और पथराव हुआ। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की, लेकिन उपद्रव तेजी से फैल गया।

जगतपुर, श्यामगंज और आजमनगर जैसे इलाकों में भी हजारों लोग जमा हो गए और पुलिस पर पथराव किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भीड़ को नियंत्रित किया और उपद्रवियों की पहचान शुरू कर दी। जांच में पता चला कि इस बवाल में बरेली के अलावा बिहार और बंगाल से भी लोग शामिल थे, जिन्हें सोशल मीडिया और धार्मिक आह्वान के माध्यम से बुलाया गया था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बरेली अनुराग आर्य ने बताया कि शुक्रवार को नमाज के समय में बदलाव कर लोगों को इस्लामिया ग्राउंड की ओर इकट्ठा होने का संदेश दिया गया था। इसके लिए फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस को पहले से आशंका थी कि अगर भीड़ जमा होगी तो स्थिति बिगड़ सकती है, इसी कारण से प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। लेकिन चेतावनी के बावजूद मौलाना तौकीर और उनके सहयोगियों ने भीड़ जुटाकर शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।

डॉक्टर नफीस की गिरफ्तारी इस केस में पुलिस की बड़ी सफलता मानी जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, नफीस की भूमिका भीड़ को भड़काने और घटनाक्रम को दिशा देने में अहम थी। वहीं, उसका बेटा फरहान सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें फैलाकर भीड़ को भड़काने का काम करता था। पुलिस इन दोनों से पूछताछ कर रही है ताकि बरेली बवाल की साजिश में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।

इस मामले में अब तक 81 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और कई अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि जो भी इस बवाल में शामिल था, चाहे उसकी भूमिका बड़ी हो या छोटी, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

बरेली की यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती साबित हुई है। अब सभी की नजर पुलिस की आगे की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर है, जिससे साफ होगा कि इस बड़े बवाल के पीछे असली साजिशकर्ता कौन थे।

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