नई दिल्ली: फैशन इंडस्ट्री दशकों से प्लास्टिक पैकेजिंग पर निर्भर रही है। कपड़ों की सुरक्षा, कम लागत और आसानी से उपलब्धता के कारण पॉलीबैग लंबे समय तक सबसे व्यावहारिक विकल्प माने जाते रहे, जबकि इसके पर्यावरणीय नुकसान को नजरअंदाज किया जाता रहा। अब इस सोच को बदलने की कोशिश करते हुए उखी ने फैशन और ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए एक नया समाधान पेश किया है।
कंपनी ने इकोग्रान (EcoGran) नाम का एक बायोडिग्रेडेबल और कम्पोस्टेबल पैकेजिंग मटीरियल लॉन्च किया है, जिसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। उखी का दावा है कि यह मटीरियल न सिर्फ पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि पारंपरिक प्लास्टिक पैकेजिंग के मुकाबले कम लागत में भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
दरअसल, फैशन इंडस्ट्री की पैकेजिंग से जुड़ी समस्या काफी बड़ी है, लेकिन अक्सर इस पर कम ध्यान दिया जाता है। अनुमान के मुताबिक, वैश्विक फैशन इंडस्ट्री हर साल करीब 180 अरब पॉलीबैग का इस्तेमाल करती है। इनमें से ज्यादातर सिंगल-यूज़ होते हैं, जिनका रीसाइक्लिंग बहुत कम होता है। ये बैग अंततः लैंडफिल, समुद्रों या माइक्रोप्लास्टिक के रूप में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। समय के साथ यह स्थिति न सिर्फ पर्यावरणीय चिंता बन गई है, बल्कि ब्रांड्स के लिए रेगुलेटरी दबाव का कारण भी बन रही है।
उखी ने इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए एक बुनियादी सवाल से शुरुआत की—क्या पैकेजिंग ऐसी हो सकती है जो इस्तेमाल के बाद बिना ज्यादा खर्च के खत्म हो जाए? इसी सवाल से इकोग्रान का विकास हुआ।
इकोग्रान एक ऐसा कम्पोस्टेबल बायोमटीरियल है, जिसे रिन्यूएबल संसाधनों से तैयार किया गया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह इंडस्ट्रियल कम्पोस्टिंग कंडीशंस में पूरी तरह से बायोडिग्रेड हो जाए और कोई जहरीला अवशेष न छोड़े। देखने और इस्तेमाल में यह प्लास्टिक जैसा ही है, लेकिन इसकी संरचना पूरी तरह अलग है।
कंपनी के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी लागत है। भारत में पारंपरिक पॉलीप्रोपाइलीन (PP) बैग के लिए नियमों के तहत कम से कम 120 माइक्रोन मोटाई जरूरी होती है, जिससे मटीरियल की खपत और लागत दोनों बढ़ जाती हैं। इकोग्रान आधारित कम्पोस्टेबल पैकेजिंग इस नियम से बंधी नहीं है, जिससे कम मटीरियल में भी मजबूती और टिकाऊपन बनाए रखा जा सकता है।
इसी कारण कीमत के स्तर पर बड़ा अंतर देखने को मिलता है। जहां एक सामान्य 13 x 16 इंच के प्लास्टिक कैरी बैग की कीमत करीब 3.6 से 4.6 रुपये प्रति पीस तक होती है, वहीं उसी आकार के इकोग्रान आधारित बायोडिग्रेडेबल बैग की कीमत इस्तेमाल और डिजाइन के आधार पर करीब 1.05 से 2.5 रुपये प्रति पीस तक बताई जा रही है। गारमेंट बैग और इंडस्ट्रियल पाउच जैसे सेगमेंट में भी इसकी कीमत पारंपरिक प्लास्टिक से कम बताई जा रही है।
उखी के एक प्रवक्ता ने कहा कि अब तक सस्टेनेबिलिटी को एक महंगा विकल्प माना जाता था। उनका कहना है कि कंपनी ने इसी सोच को बदलने का फैसला किया। इकोग्रान के जरिए ब्रांड्स को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए अतिरिक्त लागत नहीं उठानी पड़ेगी।
कंपनी का यह भी दावा है कि इकोग्रान को मौजूदा प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका मतलब है कि पैकेजिंग कन्वर्टर्स और ब्रांड्स को नई मशीनें, नई प्रक्रियाएं या सप्लाई चेन बदलने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा, हल्के वजन के कारण ट्रांसपोर्टेशन लागत में भी कमी आ सकती है।
यह लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब फैशन और ई-कॉमर्स ब्रांड्स पर सिंगल-यूज़ प्लास्टिक कम करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। रेगुलेटरी सख्ती, उपभोक्ताओं की बढ़ती जागरूकता और कंपनियों की अपनी सस्टेनेबिलिटी कमिटमेंट्स के चलते पैकेजिंग अब एक अहम मुद्दा बन चुका है।
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक कम्पोस्टेबल मटीरियल को बड़े पैमाने पर अपनाने में सबसे बड़ी बाधा उसकी ज्यादा लागत रही है। उखी का दावा है कि इकोग्रान इस बाधा को दूर करता है और समान प्लास्टिक विकल्पों के मुकाबले 70 से 80 प्रतिशत तक लागत बचत संभव बनाता है।
आगे की रणनीति के तहत, उखी फैशन ब्रांड्स, पैकेजिंग मैन्युफैक्चरर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इकोग्रान का उत्पादन और इस्तेमाल बढ़ाने की योजना बना रही है। कंपनी का लक्ष्य इसे केवल एक विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग को नया डिफॉल्ट बनाने का है।
कंपनी का मानना है कि जब कोई समाधान पर्यावरण के लिए बेहतर होने के साथ-साथ सस्ता भी हो, तो उसे अपनाने के लिए ज्यादा समझाने की जरूरत नहीं पड़ती। वह खुद ही पुरानी व्यवस्था की जगह ले लेता है।
(विज्ञापन अस्वीकरण: उपरोक्त सामग्री एक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। DD News UP इसकी विषयवस्तु के लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।)