अमेरिका में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से बढ़ रहा है मोटापा, सूजन और हृदय रोग का खतरा: नई रिसर्च का खुलासा

नई रिसर्च में खुलासा, ज्यादा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ खाने वालों में हाई-सेंसिटिव सी-रिएक्टिव प्रोटीन का स्तर काफी बढ़ा

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वाशिंगटन डीसी [अमेरिका]: आजकल बदलती जीवनशैली और तेज़ रफ्तार जिंदगी के बीच लोग फास्ट फूड और रेडी-टू-ईट आइटम्स की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) आपकी सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं? एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि जो लोग ज्यादा मात्रा में UPF खाते हैं, उनमें हाई-सेंसिटिव सी-रिएक्टिव प्रोटीन (HS-CRP) का स्तर काफी अधिक पाया जाता है। यह प्रोटीन शरीर में सूजन (Inflammation) का मुख्य संकेतक और हृदय रोग का बड़ा कारण है।

अमेरिका में 60% कैलोरी UPF से आती है

शोधकर्ताओं ने बताया कि अमेरिका के औसत वयस्क अपने दैनिक कैलोरी सेवन का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से लेते हैं, जबकि बच्चों में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यानी सोडा, चिप्स, स्नैक्स, पैक्ड जूस और प्रोसेस्ड मीट अब अमेरिकी आहार का मुख्य हिस्सा बन चुके हैं।

रिसर्च में क्या पाया गया?

यह अध्ययन अमेरिकन जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। इसमें 9,254 अमेरिकी वयस्कों के आहार और स्वास्थ्य संबंधी डाटा का विश्लेषण किया गया। परिणामों में सामने आया कि:

  • जिन लोगों ने अपनी दैनिक कैलोरी का 60-79% UPF से लिया, उनमें HS-CRP का स्तर 11% ज्यादा पाया गया।

  • मध्यम उपभोक्ताओं (40-59%) में भी यह खतरा 14% तक बढ़ा

  • मोटापे से जूझ रहे लोगों में यह खतरा 80% अधिक था।

  • धूम्रपान करने वालों में यह जोखिम 17% ज्यादा देखा गया।

  • 50 से 59 वर्ष की उम्र के लोगों में सूजन का खतरा 26% अधिक था।

    विशेषज्ञों की चेतावनी

    फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और रिसर्च की वरिष्ठ लेखिका डॉ. एलिसन एच. फेरिस का कहना है:

    “यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने वालों में सूजन और हृदय रोग का खतरा गंभीर रूप से बढ़ जाता है। ये नतीजे सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों और क्लिनिकल प्रैक्टिस दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।”

    वहीं सह-लेखक डॉ. चार्ल्स एच. हेनेकेन्स ने कहा:

    “हेल्थ प्रोफेशनल्स को चाहिए कि वे मरीजों को UPF के खतरों के बारे में जागरूक करें और उन्हें संपूर्ण भोजन (Whole Foods) अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें।”

    किन बीमारियों से जुड़ा है UPF?

    विशेषज्ञों का कहना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन केवल मोटापा और हृदय रोग ही नहीं, बल्कि इन समस्याओं से भी जुड़ा है:

    • कैंसर (खासतौर पर कोलोरेक्टल कैंसर)

    • मेटाबोलिक डिसऑर्डर

    • मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं

    • अकाल मृत्यु का खतरा

    क्या कहती है तुलना तंबाकू से?

    लेखकों ने UPF की तुलना तंबाकू के इतिहास से की है। उन्होंने कहा कि जैसे सिगरेट के नुकसान साबित होने के बावजूद उसे रोकने वाली नीतियां बनाने में दशकों लग गए, वैसे ही अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के खिलाफ भी नीतिगत बदलाव आने में समय लगेगा। इसका कारण है कि बहुराष्ट्रीय खाद्य कंपनियां बेहद प्रभावशाली हैं, ठीक वैसे ही जैसे कभी तंबाकू उद्योग था।

    सरकार और हेल्थ एजेंसियों की भूमिका

    हालांकि स्थिति चिंताजनक है, लेकिन कुछ सकारात्मक कदम भी उठाए जा रहे हैं।

    • खाद्य पदार्थों की लेबलिंग को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।

    • हानिकारक योजकों को कम करने पर काम हो रहा है।

    • स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में हेल्दी विकल्प बढ़ाए जा रहे हैं।

    लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी कई लोग किफायती और स्वास्थ्यवर्धक भोजन तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। इसके लिए एक व्यापक और समन्वित सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति की ज़रूरत है।

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