Unnao Rape Case: उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत को हरी झंडी दिखा दी थी, जिसपर आज सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया है। कुलदीप सेंगर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की अपील पर सेंगर को नोटिस भी जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
सेंगर की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को कुलदीप सेंगर की सजा को निलंबित कर दिया था और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। इस फैसले को सीबीआई ने चुनौती दी थी और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सीबीआई का कहना था कि हाईकोर्ट ने सजा को निलंबित करके POCSO एक्ट और समाज की सुरक्षा के खिलाफ काम किया है।
सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस मामले में कई गंभीर कानूनी सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के जजों की प्रतिष्ठा बहुत ऊंची है, लेकिन गलती किसी से भी हो सकती है।
पीड़िता की खुशी और प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता फूट-फूटकर रोने लगी। उसने कहा, “मुझे सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा, और मैं इस लड़ाई को जारी रखूंगी। मुझे पूरा यकीन है कि सेंगर को मृत्युदंड मिलेगा, तभी मेरे परिवार को इंसाफ मिलेगा।” पीड़िता के परिवार ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई।
मामले की सुनवाई में क्या तर्क दिए गए?
सीबीआई के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला अत्यधिक भयावह है। पीड़िता उस समय 16 साल की भी नहीं थी, और सेंगर के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 और POCSO एक्ट की धारा 5 और 6 के तहत आरोप तय किए गए थे।
तुषार मेहता ने यह भी कहा कि अगर कोई कॉन्स्टेबल ड्यूटी के दौरान ऐसी क्राइम करता है, तो उसे दोषी ठहराया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि विधायक को क्यों इस दायरे से बाहर किया गया। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि क्या इसका मतलब यह है कि अगर कोई बड़ा अधिकारी किसी व्यक्ति की मदद करने के बाद गलत काम करता है, तो उसे भी अग्रेवेटेड ऐक्ट माना जाएगा।
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उन्नाव रेप केस का पूरा घटनाक्रम
2017 में उन्नाव की पीड़िता ने बीजेपी नेता और तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर रेप का आरोप लगाया था। हालांकि, पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था। बाद में 2018 में, जब पीड़िता ने मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह करने की कोशिश की, तब यह मामला सीबीआई को सौंपा गया।
सेंगर को 2019 में एक निचली अदालत ने उम्रभर की सजा सुनाई। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की सजा सस्पेंड कर दी और उन्हें जमानत दे दी।
कोर्ट की स्थिति और न्याय की उम्मीद
सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले में कहा कि आम तौर पर जमानत पर विचार करते समय दोषी की रिहाई पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन सेंगर के मामले में यह स्थिति अलग है। क्योंकि वह पहले से एक अन्य मामले में जेल में हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पीड़िता और उसके परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है। सेंगर के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई ने एक नया मोड़ लिया है, और कोर्ट के इस फैसले से पीड़िता को राहत मिली है।