राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार (21 दिसंबर) को VB-G RAM G बिल, 2025 को मंजूरी दे दी, जिससे यह अब एक कानून बन गया है। यह कानून 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लेगा और अब ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष 125 दिन का रोजगार मिलेगा, जो पहले 100 दिन था। इस बिल के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति में सुधार होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकसित भारत 2047" विजन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
विकसित भारत के विजन के अनुरूप नया कानून
यह बिल “विकसित भारत 2047” के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी के साथ-साथ स्थायी और उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण करना है, ताकि समावेशी और संतुलित विकास को बढ़ावा मिल सके। इस बिल के तहत, सरकार की जिम्मेदारी होगी कि वह इच्छुक ग्रामीण परिवारों को कम से कम 125 दिन का रोजगार दे, जो पहले 100 दिन था।
नए रोजगार कानून के प्रावधान
नए कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी 125 दिन तक बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि मजदूरी का भुगतान अधिकतम 15 दिनों के अंदर किया जाएगा। यदि इस समय सीमा के भीतर मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता है, तो इसके लिए मुआवजे का भी प्रावधान रखा गया है। यह कदम ग्रामीण मजदूरों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा, क्योंकि इससे उनकी आर्थिक स्थिति में स्थिरता आएगी और वे अधिक समय तक काम करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

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सरकार का उद्देश्य और विपक्ष का विरोध
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि यह बिल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लेगा, जो 20 साल से अधिक पुराना हो चुका था। इस नए कानून का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आय सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके अलावा, टिकाऊ और उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण करना भी इस कानून का एक प्रमुख उद्देश्य है, जिससे ग्रामीण विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।
हालांकि, विपक्ष ने इस बिल के खिलाफ विरोध किया और आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर महात्मा गांधी का नाम हटाया है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनरेगा को बदलने और नए बिल को लाने के निर्णय को सही ठहराया। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने गांधीजी के आदर्शों को जीवित रखा है।
125 दिन रोजगार और ग्रामीण विकास की दिशा में नया कदम
नए कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन का रोजगार मिले, जिससे उनकी आजीविका की सुरक्षा हो सके। यह कानून न केवल श्रमिकों के लिए रोजगार का अवसर बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देगा। इसके तहत स्थानीय नियोजन, श्रमिक सुरक्षा और योजनाओं के एकीकरण पर भी जोर दिया गया है। यह कानून प्रधानमंत्री मोदी के “विकसित भारत 2047” के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे ग्रामीण परिवारों को स्थिर रोजगार मिलेगा, और समग्र रूप से ग्रामीण विकास को गति मिलेगी। सरकार का कहना है कि इस नए कानून के लागू होने से कृषि-रोजगार संतुलन और ग्रामीण आय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
VB-G RAM G बिल के लागू होने से भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति में सुधार होने की संभावना है। यह नया कानून 20 साल पुरानी मनरेगा योजना की जगह लेकर ग्रामीण परिवारों के लिए 125 दिन रोजगार की गारंटी देगा। इस बिल के द्वारा सरकार का उद्देश्य ग्रामीण विकास को तेज करना और रोजगार के नए अवसर प्रदान करना है, जिससे “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।







