अमरोहा पुलिस पर लगे आरोपों में नया मोड़, बच्चे के माता-पिता ने बदले बयान; मेडिकल रिपोर्ट में खुलासा

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अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में शादी समारोह के दौरान पर्स चोरी के शक में पकड़े गए चार बच्चों की पिटाई के आरोपों के मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। कलक्ट्रेट में डिप्टी कलक्टर को दिए गए शिकायती पत्र के बाद जिस मामले ने पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, अब उसी मामले में बच्चे के माता-पिता अपने पहले दिए गए बयान से मुकर गए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि बच्चे के शरीर पर मौजूद चोटें पुलिस हिरासत से पांच दिन पुरानी हैं और पूछताछ के दौरान पुलिस द्वारा पिटाई किए जाने जैसा कोई प्रमाण मेडिकल रिपोर्ट में नहीं मिला है।

घटना अमरोहा शहर में रविवार रात एक शादी समारोह के दौरान हुई, जब एक कारोबारी की पत्नी का पर्स चोरी होने की आशंका पर चार नाबालिग बच्चों को पकड़ लिया गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चों को पूछताछ के लिए कोतवाली ले जाया गया। हालांकि पर्स उनके पास से बरामद नहीं हुआ और रात में ही चारों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इसके बाद बच्चों के परिजनों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने पूछताछ के दौरान बच्चों को थर्ड डिग्री दी, बुरी तरह पीटा गया और यहां तक कि करंट लगाए जाने तक की बात भी कही गई। इनमें से एक दस वर्षीय बच्चे की हालत नाजुक बताए जाने का दावा किया गया था।

मंगलवार को बच्चे के माता-पिता उसे गोद में लेकर कलक्ट्रेट पहुंचे और डिप्टी कलक्टर को पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दी। उन्होंने कहा कि उनका दस वर्षीय बेटा निर्दोष था, फिर भी उसे पकड़कर ले जाया गया और पुलिस ने क्रूरता से पिटाई की। इस शिकायत के बाद मामला तूल पकड़ गया और पुलिस प्रशासन हरकत में आया।

लेकिन गुरुवार को पुलिस की जांच में स्थिति उलट गई। सीओ अभिषेक यादव के अनुसार, बच्चे और उसके माता-पिता के बयान दर्ज किए गए, जिसमें माता-पिता ने अब कहा कि चोटें पांच दिन पुरानी थीं और मोहल्ले के लोगों के कहने पर पुलिस के खिलाफ शिकायत कर दी गई थी। मेडिकल रिपोर्ट में भी चोटों की उम्र पुलिस हिरासत से पहले की बताई गई है, जिससे पुलिस पर लगे गंभीर आरोप कमजोर पड़ गए हैं।

मामला सामने आने पर एसपी अमित कुमार आनंद ने तुरंत संज्ञान लेते हुए सीओ सिटी को जांच का आदेश दिया था। प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर भूड़ चौकी में तैनात सिपाही नीतीश को लाइन हाजिर कर दिया गया, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। एसपी ने कहा कि विभागीय जांच जारी है और यदि कोई भी पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।

पूरे प्रकरण ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली और जनविश्वास के बीच उलझन को सामने रखा है। जहां एक ओर पहले आरोपों ने पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया था, वहीं अब माता-पिता के पलटे बयान और मेडिकल रिपोर्ट के तथ्य सामने आने से मामला नई दिशा में जा रहा है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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