वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर कल संसद में होगी विशेष चर्चा, PM मोदी लोकसभा में करेंगे शुरुआत

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संसद के शीतकालीन सत्र में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। यह चर्चा कल यानी 8 दिसंबर को संसद में आयोजित होगी, जिसमें राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को सदन में सामने लाया जाएगा। PM नरेंद्र मोदी लोकसभा में इस बहस की शुरुआत करेंगे, जबकि राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा चर्चा शुरू किए जाने की संभावना है। इस बहस में कांग्रेस के आठ नेता भी भाग लेंगे, जिनमें उप नेता प्रतिपक्ष गोरव गोगोई, प्रियंका वाड्रा, दीपेंद्र हुड्डा, बिमोल अकोइजाम, प्रणीति शिंदे, प्रशांत पडोले, चमाला रेड्डी और ज्योत्सना महंत शामिल हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बहस का समापन करेंगे।

वंदे मातरम का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है। यह गीत बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित है और पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद 1882 में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। रवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम को संगीत रूप दिया, जिससे यह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्तों का एक प्रेरक नारा बन गया।

24 जनवरी 1950 को भारत सरकार ने वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्रदान किया। यह गीत केवल स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, एकता और मातृभूमि के प्रति प्रेम का भी प्रतीक है। संसद में आयोजित इस विशेष बहस में इतिहासकारों और सांसदों द्वारा इस गीत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डाला जाएगा।

वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में इस चर्चा का आयोजन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नई पीढ़ी को देशभक्ति, स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय संस्कृति की समझ देने का एक अवसर है। यह बहस न केवल गीत के इतिहास को याद करेगी, बल्कि यह भी बताएगी कि कैसे यह गीत आज भी भारतीय समाज और राजनीति में एक प्रेरक तत्व के रूप में उपस्थित है।

संसद के शीतकालीन सत्र का आगाज 1 दिसंबर से हुआ था और यह 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के साथ ही वंदे मातरम पर यह विशेष बहस भी आयोजित की जाएगी। संसद में इस अवसर पर राष्ट्रीय गीत से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों और ऐतिहासिक घटनाओं को भी साझा किया जाएगा, जिनके बारे में आम जनता को कम ही जानकारी होती है।

वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारतवासियों के लिए गर्व, एकता और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है। संसद में होने वाली इस बहस के माध्यम से इस गीत की महत्ता और उसकी ऐतिहासिक यात्रा को व्यापक रूप से उजागर किया जाएगा। यह कार्यक्रम न केवल सदन के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक यादगार अवसर साबित होगा।

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