उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों पर केंद्र सरकार का बड़ा बयान सामने आया है। केंद्र सरकार ने कहा कि विवादित यूजीसी नियमों की दोबारा समीक्षा करेगी।
देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए UGC के नए नियम एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दरअसल, उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए UGC के नए नियमों को लेकर गुरुवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान दिया है। केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया है कि UGC Regulations, 2026 पर नए सिरे से विचार किया जा रहा है।
बता दें कि सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को भरोसा दिलाया कि सरकार सभी वर्गों के छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए नियमों की समीक्षा करेगी ताकि किसी भी वर्ग का छात्र खुद को असुरक्षित या भयभीत महसूस न करे।
UGC के विवादित नियमों पर फिर होगा विचार !
बता दें कि यह मामला उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से जुड़ा है। जिसमें उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए जनवरी 2026 में नए नियम अधिसूचित किए गए हैं। जिसके बाद नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। वहीं अब UGC के विवादित नियमों पर केंद्र सरकार ने बड़ा बयान दिया है। केंद्र सरकार ने कहा कि UGC Regulations, 2026 पर सरकार नए सिरे से विचार कर रही है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। तुषार मेहता ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को समीक्षा का भरोसा दिया। सरकार का कहना है कि सभी वर्गों के छात्रों के हितों का रखा जाएगा ध्यान। किसी भी वर्ग का छात्र खुद को असुरक्षित या भयभीत महसूस न करे। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी।
दरअसल, UGC ने इस साल जनवरी में 2026 के नियमों को अधिसूचित किया था। हालांकि, नए नियमों को लेकर सामान्य वर्ग के छात्रों ने आपत्ति जताई थी। जिसके बाद इन नियमों को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा सीमित रखी गई है और सामान्य या गैर-आरक्षित श्रेणियों के छात्रों को जाति-आधारित भेदभाव या संस्थागत पूर्वाग्रह से सुरक्षा से वंचित करती है वहीं, अब केंद्र सरकार की ओर से समीक्षा का भरोसा दिए जाने के बाद मामले में अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।







