India-New Zealand FTA: मंगलवार को विजयादशमी के शुभ अवसर पर भारत और न्यूज़ीलैंड के आर्थिक संबंधों का एक नया दौर शुरू हो रहा है। 20 2026 से लागू हो रहे मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत न्यूज़ीलैंड भारतीय उत्पादों को अपने बाज़ार में 100% शुल्क-मुक्त पहुंच (Duty-Free Access) देगा। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले इस समझौते से न केवल आर्थिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), किसानों, कारीगरों, महिला उद्यमियों और युवाओं के लिए भी वैश्विक प्रगति के नए द्वार खुलेंगे।
नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा नया भारत-न्यूज़ीलैंड समझौता
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा न्यूज़ीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने सोमवार को एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के दौरान समझौते के आधिकारिक रूप से प्रभावी होने की घोषणा की। इस दौरान पीयूष गोयल ने भारत और न्यूज़ीलैंड के संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों की साझेदारी मैदान के अंदर और बाहर, जीत की साझेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समझौते का वास्तविक मूल्यांकन इस आधार पर होगा कि दोनों देशों के नागरिकों के जीवन में किताना सकारात्मक सुधार होता है।
न्यूज़ीलैंड में शुल्क-मुक्त पहुंच से भारतीय निर्यात और एमएसएमई (MSME) को बढ़ावा
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, न्यूज़ीलैंड द्वारा शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलने से भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा के नए अवसर पैदा होंगे। इस समझौते से कपड़ा, परिधान, चमड़ा, फुटवियर, रत्न-आभूषण, ऑटो पार्ट्स, दवाइयों और प्रसंस्कृत खाद्य जैसे क्षेत्रों को विशेष फायदा मिलेगा। चूंकि इन उद्योगों में बड़ी संख्या में एमएसएमई (MSME) और श्रम-प्रधान इकाइयां शामिल हैं, इसलिए छोटे कारोबारियों को वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने और निर्यात में बढ़ोतरी करने में सहायता मिल सकती है।
भारत और न्यूज़ीलैंड ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर (लगभग 35 हजार करोड़ रुपए) तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए व्यापार में लगभग 18% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) की आवश्यकता होगी। पीयूष गोयल ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के विजन से जुड़ा एक अहम कदम बताया, जो व्यापार, तकनीक और निवेश को मजबूत करेगा। वहीं न्यूज़ीलैंड के मंत्री टॉड मैक्ले ने इस समझौते को दोनों देशों के कारोबारियों के लिए एक बड़ा अवसर बताया।
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